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Hindu Festival Calendar 2026 – सम्पूर्ण हिंदू त्योहार सूची तारीख, मुहूर्त और महत्व सहित

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Hindu Festival Calendar 2026

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है — और यह बात शत-प्रतिशत सच है। यहाँ हर महीने कोई न कोई पर्व होता है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, परिवार को एक-दूसरे के करीब लाता है और मन में श्रद्धा व उत्साह भर देता है।

साल 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 का साल है। इस साल एक विशेष बात है — इस वर्ष अधिक मास (Adhik Maas) भी पड़ रहा है जो 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। इसकी वजह से कुछ त्योहारों की तारीखें थोड़ी आगे खिसक गई हैं — जैसे दीपावली इस बार नवंबर में आएगी।

इस लेख में आपको मिलेगा — 2026 के सभी प्रमुख हिंदू त्योहारों की तारीख, वार, शुभ मुहूर्त, महत्व और एक नज़र में पूरी जानकारी। यह आपके लिए साल भर का भक्ति-कैलेंडर है — जिसे एक बार पढ़कर आप पूरे साल की तैयारी कर सकते हैं।

विषय-सूची (Table of Contents)

1.  2026 की विशेष बात – अधिक मास2.  माहवार त्योहार सूची (Calendar Table)
3.  प्रमुख त्योहारों का विवरण4.  व्रत और एकादशी 2026
5.  2026 के ग्रहण6.  त्योहार कैसे मनाएं – सामान्य नियम
7.  FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न8.  आंतरिक लिंक – और भी पढ़ें

2026 की विशेष बात – अधिक मास (Adhik Maas 2026)

हिंदू पंचांग में हर 3 साल में एक बार अधिक मास आता है। यह एक अतिरिक्त चंद्र माह होता है जो सौर-चंद्र कैलेंडर को संतुलित करता है। वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा।

अधिक मास प्रारंभ17 मई 2026, रविवार
अधिक मास समाप्ति15 जून 2026, सोमवार
देवताभगवान विष्णु
इस माह में क्या न करेंविवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण संस्कार
क्या करेंविष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा, भजन, दान-पुण्य
विशेष लाभइस माह में किए गए व्रत-पूजा का फल कई गुना मिलता है

इस साल 2026 में अधिक मास की वजह से रक्षाबंधन, दीपावली जैसे त्योहार करीब 20 दिन आगे खिसक गए हैं। इसलिए तारीखें ध्यान से देखें।

Hindu Festival Calendar 2026 – माहवार सम्पूर्ण त्योहार सूची

नीचे दी गई तालिका में 2026 के सभी प्रमुख हिंदू त्योहार, व्रत और पर्वों की तारीखें दी गई हैं। यह उत्तर भारतीय पंचांग (पूर्णिमांत) के अनुसार है।

माहत्योहार / व्रततारीख व दिन
जनवरीमकर संक्रांति / पोंगल14 जनवरी, बुधवार
जनवरीपौष पूर्णिमा13 जनवरी, मंगलवार
जनवरीगणतंत्र दिवस26 जनवरी, सोमवार
फरवरीवसंत पंचमी / सरस्वती पूजा3 फरवरी, मंगलवार
फरवरीमहाशिवरात्रि15 फरवरी, रविवार
फरवरीमाघ पूर्णिमा12 फरवरी, बृहस्पतिवार
मार्चहोलिका दहन3 मार्च, मंगलवार
मार्चहोली (धुलंडी)4 मार्च, बुधवार
मार्चहिंदू नव वर्ष / गुड़ी पड़वा / उगादि19 मार्च, बृहस्पतिवार
मार्चचैत्र नवरात्रि प्रारंभ19 मार्च, बृहस्पतिवार
मार्चराम नवमी26 मार्च, बृहस्पतिवार
मार्चहनुमान जयंती2 अप्रैल, बृहस्पतिवार
अप्रैलबैसाखी / विशु / पुथंडु14 अप्रैल, मंगलवार
अप्रैलअक्षय तृतीया19 अप्रैल, रविवार
मईबुद्ध पूर्णिमा1 मई, शुक्रवार
मईअधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ17 मई, रविवार
मईवट सावित्री व्रत28 मई, बृहस्पतिवार
जूनअधिक मास समाप्ति15 जून, सोमवार
जुलाईजगन्नाथ रथयात्रा16 जुलाई, बृहस्पतिवार
जुलाईगुरु पूर्णिमा29 जुलाई, बुधवार
अगस्तओणम26 अगस्त, बुधवार
अगस्तरक्षाबंधन28 अगस्त, शुक्रवार
अगस्तजन्माष्टमी15 अगस्त, शनिवार
सितंबरगणेश चतुर्थी14 सितंबर, सोमवार
सितंबरअनंत चतुर्दशी25 सितंबर, शुक्रवार
सितंबरपितृ पक्ष प्रारंभ27 सितंबर, रविवार
अक्टूबरमहालया अमावस्या10 अक्टूबर, शनिवार
अक्टूबरशारदीय नवरात्रि प्रारंभ11 अक्टूबर, रविवार
अक्टूबरदुर्गा अष्टमी18 अक्टूबर, रविवार
अक्टूबरदशहरा / विजयदशमी20 अक्टूबर, मंगलवार
नवंबरधनतेरस6 नवंबर, शुक्रवार
नवंबरछोटी दीपावली / नरक चतुर्दशी7 नवंबर, शनिवार
नवंबरदीपावली / लक्ष्मी पूजा8 नवंबर, रविवार
नवंबरगोवर्धन पूजा9 नवंबर, सोमवार
नवंबरभाई दूज10 नवंबर, मंगलवार
नवंबरछठ पूजा14 नवंबर, शनिवार
नवंबरदेवउठनी एकादशी / तुलसी विवाह21 नवंबर, शनिवार
दिसंबरगीता जयंती17 दिसंबर, बृहस्पतिवार
दिसंबरमोक्षदा एकादशी17 दिसंबर, बृहस्पतिवार
दिसंबरक्रिसमस25 दिसंबर, शुक्रवार

नोट: उपरोक्त तारीखें उत्तर भारतीय पंचांग पर आधारित हैं। स्थान के अनुसार कुछ तारीखों में 1 दिन का अंतर हो सकता है।

प्रमुख त्योहारों का विवरण – तारीख, मुहूर्त और महत्व

Makar Sankranti 2026 – मकर संक्रांति

तारीख14 जनवरी 2026, बुधवार
पुण्य कालसूर्योदय से लेकर शाम तक – स्नान और दान के लिए सर्वोत्तम
महत्वसूर्य का मकर राशि में प्रवेश – उत्तरायण का आरंभ
क्या करेंतिल-गुड़ का दान, सूर्य पूजा, पतंग उड़ाना, खिचड़ी दान

मकर संक्रांति वह पर्व है जब सूर्य देव धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। यह पर्व फसल कटाई, नई ऊर्जा और सूर्य की कृपा का प्रतीक है। इस दिन तिल और गुड़ बाँटने की परंपरा है क्योंकि सर्दियों में तिल शरीर को गर्म रखते हैं।

Sharandham पर पढ़ें: सूर्य देव की आरती और पूजा विधि

Maha Shivaratri 2026 – महाशिवरात्रि

तारीख15 फरवरी 2026, रविवार
निशीथ काल12 फरवरी की रात – अभिजित मुहूर्त (अनुमानित रात 12:00 बजे)
चतुर्दशी तिथिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
महत्वभगवान शिव की सबसे प्रिय रात – शिव-पार्वती विवाह का पर्व
क्या करेंरात्रि जागरण, शिवलिंग अभिषेक, शिव चालीसा पाठ, उपवास

महाशिवरात्रि भगवान शिव की सबसे प्रिय रात है। मान्यता है कि इस रात भगवान शिव ने माँ पार्वती से विवाह किया था। जो भक्त इस रात जागकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष का मार्ग खुलता है। इस दिन बेलपत्र, दूध, गंगाजल और धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक करना विशेष फलदायी होता है।

Sharandham पर पढ़ें: शिव चालीसा हिंदी में | महाशिवरात्रि व्रत कथा

Holi 2026 – होली

होलिका दहन3 मार्च 2026, मंगलवार (रात में)
होली (रंग)4 मार्च 2026, बुधवार
पूर्णिमा तिथि3 मार्च रात 8:15 बजे से 4 मार्च रात 10:15 बजे तक
ग्रहण सूचना3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण – सूतक नियम लागू
महत्वबुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम और रंगों का उत्सव
क्या करेंहोलिका दहन पूजन, रंग खेलना, मिठाई बाँटना, क्षमा माँगना

2026 की होली विशेष है — इस बार होलिका दहन की रात पूर्ण चंद्र ग्रहण भी है। ग्रहण के दौरान सूतक काल में पूजा नहीं होती, इसलिए होलिका दहन ग्रहण समाप्ति के बाद करें। होली प्रेम के देवता कृष्ण और राधा की रासलीला का प्रतीक है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में रंग भरें, मन की कड़वाहट मिटाएं।

Sharandham पर पढ़ें: राधा-कृष्ण आरती

Chaitra Navratri & Ram Navami 2026 – चैत्र नवरात्रि और राम नवमी

नवरात्रि प्रारंभ19 मार्च 2026, बृहस्पतिवार (प्रतिपदा)
राम नवमी26 मार्च 2026, बृहस्पतिवार (नवमी)
नवरात्रि पारण27 मार्च 2026, शुक्रवार
महत्वमाँ दुर्गा के 9 स्वरूपों की 9 दिन पूजा, राम जन्मोत्सव
व्रत नियमफलाहार या निर्जला — व्यक्ति की श्रद्धा और शक्ति अनुसार

चैत्र नवरात्रि हिंदू नव वर्ष के साथ शुरू होती है। इन 9 दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की क्रमशः पूजा की जाती है।

नवमी तिथि पर भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन राम नवमी मनाई जाती है। घरों और मंदिरों में राम जन्म उत्सव होता है, रामायण का पाठ किया जाता है।

Sharandham पर पढ़ें: दुर्गा चालीसा | नवरात्रि व्रत कथा

Janmashtami 2026 – जन्माष्टमी

तारीख15 अगस्त 2026, शनिवार
अष्टमी तिथिभाद्रपद कृष्ण अष्टमी
जन्म मुहूर्तरात्रि 12 बजे के आसपास — रोहिणी नक्षत्र में
महत्वभगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव — प्रेम और भक्ति का पर्व
क्या करेंरात्रि जागरण, भजन-कीर्तन, कृष्ण मंदिर दर्शन, दही हांडी

जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन है। मथुरा, वृंदावन, द्वारका और पुरी में इस दिन विशाल उत्सव होता है। भक्त रात भर जागकर भजन-कीर्तन करते हैं और रात ठीक 12 बजे — जिस समय कृष्ण का जन्म हुआ था — मूर्ति का अभिषेक और पंचामृत से श्रृंगार करते हैं।

Sharandham पर पढ़ें: कृष्ण आरती | जन्माष्टमी व्रत कथा

Ganesh Chaturthi 2026 – गणेश चतुर्थी

तारीख14 सितंबर 2026, सोमवार
अनंत चतुर्दशी25 सितंबर 2026, शुक्रवार (विसर्जन)
पूजा मुहूर्तमध्याह्न काल (सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे — अनुमानित)
महत्वगणेश जी का जन्मोत्सव — 10 दिन का महोत्सव
विशेष भोगमोदक, लड्डू, केला, दूर्वा, पान

गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। महाराष्ट्र में यह 10 दिन का महोत्सव होता है जो देश का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव माना जाता है। घरों में और सार्वजनिक पंडालों में भव्य गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। अनंत चतुर्दशी को हर्षोल्लास के साथ विसर्जन होता है।

Sharandham पर पढ़ें: गणेश चालीसा हिंदी में | गणेश पूजा विधि

Sharad Navratri & Dussehra 2026 – शारदीय नवरात्रि और दशहरा

नवरात्रि प्रारंभ11 अक्टूबर 2026, रविवार
दुर्गा अष्टमी18 अक्टूबर 2026, रविवार
दशहरा20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
महत्वमाँ दुर्गा की शक्ति उपासना, राम-रावण युद्ध में विजय
क्या करेंकन्या पूजन, जगराता, रामलीला, रावण दहन

शारदीय नवरात्रि वर्ष की सबसे बड़ी नवरात्रि है। यह अश्विन मास में आती है जब मौसम बदलता है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा की विशेष कृपा होती है। नवमी पर कन्या पूजन और दशमी पर रावण दहन — यही शारदीय नवरात्रि का समापन है। दशहरा असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।

Sharandham पर पढ़ें: माँ दुर्गा की आरती | नवरात्रि पूजा विधि

Diwali 2026 – दीपावली पंचदिवसीय महोत्सव

धनतेरस6 नवंबर 2026, शुक्रवार
छोटी दीपावली7 नवंबर 2026, शनिवार
दीपावली / लक्ष्मी पूजा8 नवंबर 2026, रविवार
लक्ष्मी पूजा मुहूर्तप्रदोष काल — सूर्यास्त के बाद (अनुमानित 6:00–8:00 PM)
गोवर्धन पूजा9 नवंबर 2026, सोमवार
भाई दूज10 नवंबर 2026, मंगलवार
महत्वमाँ लक्ष्मी का आगमन, भगवान राम की अयोध्या वापसी

दीपावली भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रिय त्योहार है। इस वर्ष अधिक मास के कारण दीपावली नवंबर में मनाई जाएगी। घर में दीपक जलाना, माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करना, मिठाई बाँटना और नए कपड़े पहनना — यही दीपावली की आत्मा है।

धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन धन्वंतरि भगवान और यमराज की पूजा भी की जाती है।

Sharandham पर पढ़ें: लक्ष्मी माता की आरती | दीपावली पूजा विधि

व्रत और एकादशी 2026 – Ekadashi & Vrat Dates

2026 में अधिक मास के कारण सामान्यतः 24 एकादशियों की जगह 26 एकादशियाँ होंगी। कुछ प्रमुख व्रत और एकादशियाँ:

व्रत / एकादशीतारीखदेवता / विशेषता
मौनी अमावस्या29 जनवरी, बृहस्पतिवारमौन व्रत + स्नान-दान
षट्तिला एकादशी27 जनवरी, मंगलवारभगवान विष्णु
महाशिवरात्रि व्रत15 फरवरी, रविवारभगवान शिव
पापमोचनी एकादशी15 मार्च, रविवारभगवान विष्णु
निर्जला एकादशीजून 2026 (अनुमानित)सर्वश्रेष्ठ एकादशी
देवशयनी एकादशीजुलाई 2026विष्णु जी का योगनिद्रा प्रवेश
करवा चौथअक्टूबर 2026सौभाग्यवती स्त्रियों का व्रत
देवउठनी एकादशी21 नवंबर, शनिवारविवाह मुहूर्त प्रारंभ
मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती17 दिसंबर, बृहस्पतिवारश्रीमद्भगवद्गीता जन्म

सभी एकादशी व्रत कथाएं पढ़ें: एकादशी व्रत कथा संग्रह

2026 के ग्रहण – Eclipse Dates

2026 में कुल 4 ग्रहण पड़ेंगे। भारत में दिखने वाले ग्रहण में सूतक नियम लागू होंगे:

ग्रहणतारीखप्रकारभारत में दृश्य?
सूर्य ग्रहण17 फरवरी 2026आंशिकनहीं
चंद्र ग्रहण3 मार्च 2026पूर्णहाँ
सूर्य ग्रहण12 अगस्त 2026पूर्णनहीं
चंद्र ग्रहण28 अगस्त 2026आंशिकहाँ

भारत में दिखने वाले ग्रहण के दिन सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करके पूजा-पाठ करें।

त्योहार कैसे मनाएं – सामान्य नियम और परंपरा

पूजा के सामान्य नियम

  • त्योहार से एक दिन पहले घर की सफाई करें — माँ लक्ष्मी और देवताओं को स्वच्छता प्रिय है।
  • पूजा के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा सामग्री एकत्रित करें — अक्षत, रोली, पान, नारियल, दीप, अगरबत्ती।
  • श्रद्धा और भक्तिभाव सबसे महत्वपूर्ण है — धन से नहीं, मन से पूजें।

व्रत के दौरान क्या खाएं / क्या न खाएं

क्या खाएं (सात्त्विक / व्रत आहार)क्या न खाएं (वर्जित)
फल (केला, सेब, संतरा)मांस, मछली, अंडा
साबूदाना खिचड़ीप्याज, लहसुन
सिंघाड़े का आटागेहूं, चावल (अधिकांश व्रत में)
कुट्टू का आटानमक (सेंधा नमक उचित है)
मखाना, दूध, दहीशराब, तम्बाकू
मूंगफली, काजू, किशमिशबाजारू जंक फूड

Hindu Festival Calendar 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

2026 में होली कब है?

होली 2026 में 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार की रात को होगा। इस बार होलिका दहन की रात पूर्ण चंद्र ग्रहण भी है — ग्रहण समाप्ति के बाद ही दहन करें।

2026 में दीपावली कब है?

दीपावली 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। अधिक मास के कारण इस साल दीपावली नवंबर में है। धनतेरस 6 नवंबर, भाई दूज 10 नवंबर को मनाया जाएगा।

2026 में अधिक मास कब है और इसका क्या मतलब है?

अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। यह एक अतिरिक्त हिंदू महीना होता है जो हर 3 साल में एक बार आता है। इस माह में शादी, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते — लेकिन पूजा-पाठ, व्रत और दान का विशेष महत्व होता है।

2026 में जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन हैं?

हाँ! 2026 में जन्माष्टमी और भारत का स्वतंत्रता दिवस दोनों 15 अगस्त, शनिवार को पड़ रहे हैं। यह एक दुर्लभ और शुभ संयोग है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के साथ देशभक्ति का उत्सव — दोहरी खुशी का दिन।

2026 में चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि कब हैं?

चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 (बृहस्पतिवार) से 27 मार्च तक है। शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) से शुरू होकर 20 अक्टूबर (दशहरा) तक चलेगी। दोनों नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

Hindu Festival Calendar 2026 में कितने एकादशी व्रत हैं?

2026 में अधिक मास के कारण सामान्य 24 की जगह 26 एकादशियाँ होंगी। हर महीने दो एकादशी होती हैं — एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पवित्र व्रत माना जाता है।

2026 में कौन से ग्रहण भारत में दिखेंगे?

2026 में दो ग्रहण भारत में दिखेंगे — 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण और 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण। दिखने वाले ग्रहण में सूतक काल मान्य होता है इसलिए इन दिनों पूजा-पाठ ग्रहण समाप्ति के बाद ही करें।

Sharandham पर और भी पढ़ें – Related Festival Articles

प्रमुख त्योहारों की विस्तृत जानकारी

दीपावली: दीपावली पूजा विधि

नवरात्रि: नवरात्रि व्रत कथा

जन्माष्टमी: जन्माष्टमी व्रत कथा

गणेश चतुर्थी: गणेश चालीसा

महाशिवरात्रि: महाशिवरात्रि व्रत कथा

देवी-देवताओं की आरती और चालीसा

माँ लक्ष्मी: लक्ष्मी माता की आरती

माँ दुर्गा: दुर्गा चालीसा हिंदी में

भगवान शिव: शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र

भगवान विष्णु: सत्यनारायण कथा

श्री राम: राम चालीसा और आरती

निष्कर्ष – त्योहार हमारी आत्मा हैं

2026 का यह साल त्योहारों से भरपूर है। मकर संक्रांति की तिल की मिठास से लेकर दीपावली की दीपों की रोशनी तक — हर त्योहार हमें कुछ सिखाता है, कुछ देता है और जीवन में नई ऊर्जा भर देता है।

चाहे होली का रंग हो, नवरात्रि का जागरण हो, जन्माष्टमी की आधी रात की आरती हो या दीपावली की लक्ष्मी पूजा — हर पल को पूरी श्रद्धा और आनंद से जिएं।

इस Hindu Festival Calendar 2026 को बुकमार्क करें और Sharandham के साथ हर त्योहार को और भी खास बनाएं।

जय माता दी! जय श्री राम! हर हर महादेव!
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गुरु पूर्णिमा 2026: महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

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गुरु पूर्णिमा 2026

गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के सम्मान, श्रद्धा और आशीर्वाद को समर्पित माना जाता है। सनातन परंपरा में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है क्योंकि गुरु ही जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था।

इस पावन अवसर पर लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं, आशीर्वाद लेते हैं और आध्यात्मिक साधना करते हैं। आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि, मंत्र और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य।

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में गुरु को ज्ञान का स्रोत माना गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व शिष्य और गुरु के पवित्र संबंध को दर्शाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु की पूजा और सेवा करने से जीवन में सफलता, ज्ञान और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

यह पर्व विद्यार्थियों, साधकों और आध्यात्मिक लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास जी की पूजा भी की जाती है, जिन्होंने वेदों और पुराणों का ज्ञान दुनिया को दिया।

गुरु पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – (अपडेट अनुसार जोड़ें)
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – (अपडेट अनुसार जोड़ें)
  • पूजा का शुभ समय – सुबह ब्रह्म मुहूर्त और शाम का समय शुभ माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा पूजा सामग्री

पूजा के लिए निम्न सामग्री तैयार रखें:

  • गुरु या महर्षि वेदव्यास जी की तस्वीर
  • फूल और माला
  • धूप और दीपक
  • चंदन
  • अक्षत
  • मिठाई और फल
  • गंगाजल
  • पीले वस्त्र
  • प्रसाद

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

1. सुबह स्नान करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

2. पूजा स्थल तैयार करें

घर के मंदिर या साफ स्थान पर गुरु या वेदव्यास जी की तस्वीर स्थापित करें।

3. दीपक और धूप जलाएं

घी का दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें।

4. गुरु पूजन करें

गुरु की तस्वीर पर चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

गुरु मंत्र:

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”

6. आरती और प्रसाद

पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?

  • गुरु का आशीर्वाद लें
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
  • दान और सेवा करें
  • ध्यान और साधना करें

गुरु पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • गुरु का अपमान न करें
  • क्रोध और विवाद से बचें
  • गलत शब्दों का प्रयोग न करें
  • नकारात्मक सोच से दूर रहें

गुरु पूर्णिमा पूजा के लाभ

  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है
  • जीवन में सफलता प्राप्त होती है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • गुरु कृपा प्राप्त होती है
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है

गुरु पूर्णिमा FAQ

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा गुरु के सम्मान और महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में मनाई जाती है।

गुरु पूर्णिमा पर किसकी पूजा की जाती है?

इस दिन गुरु, महर्षि वेदव्यास और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

गुरु पूर्णिमा पर कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः…” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा का क्या महत्व है?

यह दिन ज्ञान, आध्यात्मिकता और गुरु कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है।

क्या गुरु पूर्णिमा पर व्रत रखा जाता है?

हाँ, कई लोग इस दिन व्रत रखकर पूजा और साधना करते हैं।

Sharandham पर और भी पढ़ें

पूर्णिमा से जुड़ी भक्ति सामग्री

कथा: श्री सत्यनारायण कथा

आरती: माँ लक्ष्मी की आरती

चालीसा: विष्णु चालीसा हिंदी में

पूजा विधि: सत्यनारायण पूजा विधि

अन्य तिथि कैलेंडर

एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List – सभी 26 एकादशी तारीख

अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates – सभी 13 अमावस्या तारीख

त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026

निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप और गुरु सेवा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है।

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Ekadashi 2026 List – सभी 26 एकादशी व्रत की तारीख, नाम और महत्व

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Ekadashi 2026 List

हिंदू पंचांग में एकादशी उस तिथि को कहते हैं जो हर चंद्र माह में दो बार आती है — एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। यानी साल में 24 एकादशियाँ होती हैं। लेकिन वर्ष 2026 में अधिक मास (अधिक ज्येष्ठ) के कारण दो अतिरिक्त एकादशियाँ और जुड़ जाती हैं — जिससे इस साल कुल 26 एकादशियाँ हैं।

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक एकादशी का व्रत करता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों और सौ राजसूय यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। एकादशी केवल उपवास नहीं है — यह मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का दिन है।

इस पृष्ठ पर आपको मिलेगी 2026 की सभी 26 एकादशियों की सम्पूर्ण सूची — तारीख, नाम, पक्ष, और हर एकादशी का विशेष महत्व।

Ekadashi 2026 – एक नज़र में

कुल एकादशी 202626 (24 सामान्य + 2 अधिक मास की विशेष एकादशी)
अधिक मास17 मई – 15 जून 2026 (अधिक ज्येष्ठ मास)
पहली एकादशी14 जनवरी 2026 — षट्तिला एकादशी
अंतिम एकादशी20 दिसंबर 2026 — मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)
सबसे कठिन व्रतनिर्जला एकादशी (25 जून) — बिना जल के उपवास
सबसे महत्वपूर्णदेवशयनी, देवउठनी, निर्जला, मोक्षदा एकादशी
देवताभगवान विष्णु (श्री हरि)
पारणअगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद

Ekadashi 2026 List – सम्पूर्ण 26 एकादशी तारीख और नाम

नीचे दी गई सूची उत्तर भारतीय पंचांग (IST, नई दिल्ली) पर आधारित है। स्थान के अनुसार तारीख में 1 दिन का अंतर हो सकता है।

क्र.एकादशी नामतारीख व दिनपक्ष / मास
1षट्तिला एकादशी14 जनवरी 2026, बुधवारपौष कृष्ण एकादशी
2जया एकादशी29 जनवरी 2026, बृहस्पतिवारमाघ शुक्ल एकादशी
3विजया एकादशी13 फरवरी 2026, शुक्रवारमाघ कृष्ण एकादशी
4आमलकी एकादशी27 फरवरी 2026, शुक्रवारफाल्गुन शुक्ल एकादशी
5पापमोचनी एकादशी15 मार्च 2026, रविवारचैत्र कृष्ण एकादशी
6कामदा एकादशी29 मार्च 2026, रविवारचैत्र शुक्ल एकादशी
7वरूथिनी एकादशी13 अप्रैल 2026, सोमवारवैशाख कृष्ण एकादशी
8मोहिनी एकादशी27 अप्रैल 2026, सोमवारवैशाख शुक्ल एकादशी
9अपरा एकादशी13 मई 2026, बुधवारज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
10पद्मिनी एकादशी (अधिक मास)27 मई 2026, बुधवारअधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
11परमा एकादशी (अधिक मास)11 जून 2026, बृहस्पतिवारअधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
12निर्जला एकादशी25 जून 2026, बृहस्पतिवारज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
13योगिनी एकादशी10 जुलाई 2026, शुक्रवारआषाढ़ कृष्ण एकादशी
14देवशयनी एकादशी25 जुलाई 2026, शनिवारआषाढ़ शुक्ल एकादशी
15कामिका एकादशी9 अगस्त 2026, रविवारश्रावण कृष्ण एकादशी
16श्रावण पुत्रदा एकादशी23 अगस्त 2026, रविवारश्रावण शुक्ल एकादशी
17अजा एकादशी7 सितंबर 2026, सोमवारभाद्रपद कृष्ण एकादशी
18परिवर्तिनी / पद्मा एकादशी22 सितंबर 2026, मंगलवारभाद्रपद शुक्ल एकादशी
19इंदिरा एकादशी6 अक्टूबर 2026, मंगलवारआश्विन कृष्ण एकादशी
20पापांकुशा एकादशी22 अक्टूबर 2026, बृहस्पतिवारआश्विन शुक्ल एकादशी
21रमा एकादशी5 नवंबर 2026, बृहस्पतिवारकार्तिक कृष्ण एकादशी
22देवउठनी / प्रबोधिनी एकादशी20 नवंबर 2026, शुक्रवारकार्तिक शुक्ल एकादशी
23उत्पन्ना एकादशी4 दिसंबर 2026, शुक्रवारमार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
24मोक्षदा एकादशी20 दिसंबर 2026, रविवारमार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

* पारण (व्रत खोलना): प्रत्येक एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करें।

हर एकादशी का महत्व – संक्षिप्त विवरण

हर एकादशी का अपना अलग महत्व और कथा है। यहाँ सभी 26 एकादशियों का संक्षिप्त महत्व दिया गया है:

एकादशीमहत्व / विशेषता
षट्तिला एकादशीदान-पुण्य का विशेष दिन, तिल दान से पापों का नाश
जया एकादशीभूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति, स्वर्गलोक प्राप्ति
विजया एकादशीशत्रुओं पर विजय, युद्ध या संघर्ष में सफलता
आमलकी एकादशीआंवले की पूजा — आयु, स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति
पापमोचनी एकादशीपापों से मुक्ति, नकारात्मक ऊर्जा का नाश
कामदा एकादशीमनोकामना पूर्ण, शाप-मोचन
वरूथिनी एकादशीदस अश्वमेध यज्ञ का फल, सौभाग्य वृद्धि
मोहिनी एकादशीमोह-माया से मुक्ति, राम जी की पूजा
अपरा एकादशीअपार पुण्य, ब्रह्महत्या जैसे पापों का नाश
पद्मिनी एकादशी (अधिक मास)अधिक मास की विशेष एकादशी — हजार गुना फल
परमा एकादशी (अधिक मास)अधिक मास की दूसरी विशेष एकादशी — विष्णु जी को अत्यंत प्रिय
निर्जला एकादशीसभी 24 एकादशियों का फल — बिना जल के उपवास
योगिनी एकादशीरोग-शोक से मुक्ति, ८८ हजार ब्राह्मण भोज का पुण्य
देवशयनी एकादशीचातुर्मास प्रारंभ — भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं
कामिका एकादशीतुलसी पूजा से विशेष फल, श्रावण का पवित्र व्रत
श्रावण पुत्रदा एकादशीसंतान प्राप्ति, पुत्र की लंबी उम्र के लिए
अजा एकादशीअजन्मे दोषों का नाश, वाजपेय यज्ञ का फल
परिवर्तिनी / पद्मा एकादशीविष्णु जी करवट बदलते हैं — करोड़ों गोदान का फल
इंदिरा एकादशीपितृ दोष से मुक्ति, पितरों की आत्मा की शांति
पापांकुशा एकादशीपापों का नाश, नरक से मुक्ति
रमा एकादशीधन-धान्य, सौभाग्य और वैभव
देवउठनी / प्रबोधिनी एकादशीविष्णु जी जागते हैं — चातुर्मास समाप्त, विवाह मुहूर्त शुरू
उत्पन्ना एकादशीएकादशी व्रत की उत्पत्ति का दिन — महाफलदायी
मोक्षदा एकादशीगीता जयंती — मोक्ष प्राप्ति, वैकुंठ एकादशी

2026 की 4 सबसे महत्वपूर्ण एकादशियाँ

निर्जला एकादशी – 25 जून 2026 (सर्वश्रेष्ठ एकादशी)

निर्जला एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहते हैं। इस दिन बिना अन्न और बिना जल के उपवास किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह एकादशी अकेले साल की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य देती है। जेठ के महीने में यह व्रत करना अत्यंत कठिन है, लेकिन उतना ही फलदायी भी।

देवशयनी एकादशी – 25 जुलाई 2026 (चातुर्मास प्रारंभ)

इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दिन से चातुर्मास शुरू होता है — जिसमें विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। चातुर्मास में पूजा-पाठ, भजन और साधना का विशेष महत्व है।

देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर 2026 (चातुर्मास समाप्ति)

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की नींद से जागते हैं। इस दिन से विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त फिर शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है।

मोक्षदा एकादशी – 20 दिसंबर 2026 (गीता जयंती)

मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था — इसलिए इसे गीता जयंती भी कहते हैं। इस दिन पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और भक्त को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

अधिक मास 2026 की दो विशेष एकादशियाँ

2026 में अधिक ज्येष्ठ मास (17 मई – 15 जून) के दौरान दो अतिरिक्त एकादशियाँ आती हैं। शास्त्रों में इन्हें साधारण एकादशियों से हजार गुना अधिक फलदायी बताया गया है।

पद्मिनी एकादशी27 मई 2026 (बुधवार) — अधिक मास शुक्ल एकादशी — सम्पत्ति दोष और दरिद्रता से मुक्ति
परमा एकादशी11 जून 2026 (बृहस्पतिवार) — अधिक मास कृष्ण एकादशी — विष्णु जी को अत्यंत प्रिय, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति

इन दोनों दिनों भगवान विष्णु की विशेष पूजा, भजन, सत्यनारायण कथा और दान करने से अत्यंत शुभ फल मिलता है।

Ekadashi Vrat Vidhi – व्रत की सही विधि

दशमी (एक दिन पहले)

  • एकादशी से एक दिन पहले सात्त्विक भोजन करें।
  • रात को हल्का भोजन करें — प्याज, लहसुन, माँस वर्जित।
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं।

एकादशी के दिन

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की मूर्ति/फोटो के सामने दीप, फूल, तुलसी दल, पान, अक्षत और फल अर्पित करें।
  3. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
  4. विष्णु सहस्रनाम, भागवत कथा या एकादशी माहात्म्य का पाठ करें।
  5. दिन-रात जागरण करें — भजन-कीर्तन में समय बिताएं।
  6. व्रत में केवल फलाहार, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा ग्रहण करें।
  7. चावल, गेहूं, दाल और नमक (सेंधा नमक स्वीकृत है) वर्जित है।

द्वादशी पर पारण

  • अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद पारण करें।
  • पारण से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
  • पारण का समय: पंचांग में दिए द्वादशी के अनुसार — इसे अनदेखा न करें।

एकादशी व्रत की विस्तृत कथा पढ़ें: एकादशी व्रत कथा संग्रह

Ekadashi Vrat में क्या खाएं / क्या न खाएं

क्या खाएं (अनुमति है)क्या न खाएं (वर्जित है)
फल — केला, सेब, अनार, आम, अंगूरचावल, गेहूं, जौ, मक्का
दूध, दही, पनीर, मट्ठासभी प्रकार की दाल
मखाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटाप्याज, लहसुन, हरी सब्जियां (कुछ परंपराओं में)
साबूदाना खिचड़ी या खीरमाँस, मछली, अंडा
मूंगफली, काजू, बादाम, किशमिशसाधारण नमक (सेंधा नमक चलता है)
शहद, चाय (बिना दूध)शराब, तम्बाकू
आलू, शकरकंद (सात्त्विक रूप से)बाजारू जंक फूड, तले-भुने व्यंजन

Ekadashi 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

2026 में कितनी एकादशियाँ हैं?

2026 में कुल 26 एकादशियाँ हैं। सामान्य वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, लेकिन 2026 में अधिक मास (17 मई – 15 जून) पड़ने के कारण 2 अतिरिक्त एकादशियाँ — पद्मिनी (27 मई) और परमा (11 जून) — भी आती हैं।

एकादशी का व्रत किसके लिए है?

एकादशी व्रत भगवान विष्णु के भक्तों के लिए है। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध — सभी इस व्रत को कर सकते हैं। जो पूर्ण उपवास नहीं कर सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। मुख्य बात श्रद्धा और भक्ति है।

एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल में महर्षि जी का वास होता है — इसलिए इसे खाना वर्जित माना जाता है। इस दिन अन्न (अनाज) का सेवन पुण्य को नष्ट करता है। इसीलिए व्रत में फल, दूध और कुट्टू का आटा खाया जाता है।

2026 में सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन सी है?

2026 की चार सबसे महत्वपूर्ण एकादशियाँ हैं: (1) निर्जला एकादशी (25 जून) — सभी एकादशियों का फल देने वाली, (2) देवशयनी एकादशी (25 जुलाई) — चातुर्मास शुरू, (3) देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) — चातुर्मास समाप्त, और (4) मोक्षदा एकादशी (20 दिसंबर) — गीता जयंती।

एकादशी पारण का क्या अर्थ है?

पारण का अर्थ है एकादशी व्रत का समापन — यानी उपवास तोड़ना। यह अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद करना चाहिए। पारण का समय पंचांग में दिया होता है — समय से बाहर पारण करना पुण्य को नष्ट करता है।

क्या एकादशी का व्रत बीमारी में भी करना चाहिए?

बीमारी या कमजोरी की स्थिति में पूर्ण उपवास जरूरी नहीं है। ऐसे में फलाहार, दूध या हल्का सात्त्विक भोजन करते हुए मन से विष्णु जी का स्मरण करना भी व्रत के समान फल देता है। भगवान भाव के भूखे हैं, कठोरता के नहीं।

क्या अधिक मास की एकादशियाँ ज्यादा फलदायी हैं?

हाँ। शास्त्रों के अनुसार अधिक मास की एकादशियाँ — पद्मिनी (27 मई) और परमा (11 जून) — सामान्य एकादशियों से हजार गुना अधिक फलदायी हैं। यह अधिक मास भगवान विष्णु का महीना है, इसलिए इस माह में किए गए व्रत और पूजा का विशेष पुण्य मिलता है।

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निष्कर्ष – एकादशी व्रत: जीवन का सबसे सरल और शक्तिशाली व्रत

एकादशी व्रत के लिए न कोई बड़ा आयोजन चाहिए, न ज्यादा पैसा — बस चाहिए श्रद्धा, संकल्प और भगवान विष्णु पर विश्वास। साल में 26 एकादशियाँ मतलब 26 बार आपके जीवन को बेहतर बनाने का अवसर।

इस Ekadashi 2026 List को bookmark करें और हर एकादशी पर अपने भगवान की आराधना करें। जय श्री हरि!

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — प्रत्येक एकादशी पर जाप करें, श्री हरि की कृपा पाएं।
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Amavasya May 2026 – शनि अमावस्या: तारीख, पूजा विधि, महत्व और शनि दोष निवारण

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Shani Amavasya May 2026

‘शनि अमावस्या’ — यह नाम सुनते ही बहुत लोगों के मन में एक विशेष भावना जागती है। जब कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शनिवार को पड़ती है, तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं। यह दिन शनि देव की कृपा पाने, शनि दोष निवारण और पितृ तर्पण के लिए वर्ष की सबसे शक्तिशाली तिथियों में से एक माना जाता है।

2026 में शनि अमावस्या 16 मई, शनिवार को है — और यह अधिक मास से ठीक एक दिन पहले है। इसलिए इस बार का यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

Amavasya May 2026 – तारीख और विवरण

तारीख16 मई 2026, शनिवार
तिथिज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या (शनि अमावस्या)
अमावस्या प्रारंभ16 मई 2026, सुबह 5:11 बजे
अमावस्या समाप्ति17 मई 2026, रात 1:30 बजे
कुतुप मुहूर्तदोपहर 11:36 – 12:24 बजे — पितृ तर्पण के लिए सर्वोत्तम
विशेष संयोगअधिक मास प्रारंभ 17 मई से — यह आखिरी नियमित अमावस्या
शनि देवशनि अमावस्या — शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या निवारण
पितृ कार्यज्येष्ठ अमावस्या — पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए उत्तम

Shani Amavasya का महत्व – क्यों है यह इतनी खास?

शनि देव का संबंध

शनि देव न्याय के देवता हैं — वे कर्म के अनुसार फल देते हैं। जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि महादशा से प्रभावित हैं, उनके लिए शनि अमावस्या एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन की गई पूजा और दान शनि देव को प्रसन्न करते हैं और उनके प्रकोप को शांत करते हैं।

पितरों का संबंध

प्रत्येक अमावस्या पितरों को समर्पित होती है। शनि अमावस्या पर शनि देव और पितर — दोनों की एक साथ पूजा होती है। पितृ दोष से मुक्ति और पितरों की शांति के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

विशेष संयोग

यह 16 मई की अमावस्या और भी खास है क्योंकि अधिक मास 17 मई से शुरू होगा। यानी यह अमावस्या अधिक मास से ठीक पहले की है — और पंचांग के अनुसार इस समय किए गए शनि पूजन और पितृ तर्पण का फल कई गुना होता है।

Shani Amavasya Puja Vidhi – पूजा विधि

प्रातःकाल

  1. ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. शनि मंदिर जाएं या घर पर शनि यंत्र या शनि देव की तस्वीर के सामने दीप जलाएं।
  3. काला तिल, सरसों का तेल, काली उड़द दाल, और लोहे का दान करें।
  4. ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ या ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

कुतुप मुहूर्त में पितृ तर्पण

  1. दोपहर 11:36 – 12:24 बजे के बीच — दक्षिण दिशा में मुख करके।
  2. काले तिल, कुश घास और जल से पितरों को तर्पण दें।
  3. पितरों का नाम लेकर जल अर्पित करें।
  4. ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।

पीपल पूजन

  1. पीपल के पेड़ में सरसों का तेल और जल चढ़ाएं।
  2. 107 बार पीपल की परिक्रमा करें (शनि अमावस्या पर यह संख्या शुभ)।
  3. पीपल की जड़ में दीपक जलाएं।

शनि दोष निवारण के उपाय – Shani Amavasya पर

  • शनि मंदिर में सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करें।
  • काले तिल, काली उड़द दाल और काले कपड़े का दान करें।
  • किसी विकलांग, वृद्ध या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें — शनि देव इससे प्रसन्न होते हैं।
  • हनुमान जी की पूजा करें — हनुमान जी शनि के प्रकोप से बचाते हैं।
  • ‘शनि चालीसा’ का पाठ करें।
  • दोपहर में काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।
  • नीलम या नीली रंग की चीजें दान करें।

हनुमान जी की आरती: हनुमान आरती हिंदी में

क्या खाएं / क्या न खाएं – Amavasya Vrat

क्या करेंक्या न करें
फल — केला, सेब, अंगूरमाँस, मछली, अंडा
दूध, दही, मखानाप्याज, लहसुन
कुट्टू या साबूदाना (व्रत में)चावल, गेहूं (सख्त व्रत में)
तिल के लड्डू, गुड़तामसिक भोजन, नशा
काले तिल का दान और सेवननकारात्मक विचार

Amavasya May 2026 – FAQs

मई 2026 में अमावस्या कब है?

मई 2026 में अमावस्या 16 मई, शनिवार को है। यह ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या है जो शनिवार को पड़ने के कारण ‘शनि अमावस्या’ बन जाती है।

शनि अमावस्या 2026 क्यों खास है?

2026 की शनि अमावस्या (16 मई) इसलिए खास है क्योंकि यह अधिक मास शुरू होने से ठीक एक दिन पहले है। इस अवसर पर शनि दोष निवारण, पितृ तर्पण और विष्णु पूजा का फल कई गुना होता है।

शनि अमावस्या पर क्या दान करें?

शनि अमावस्या पर काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द दाल, लोहे का सामान, काले कपड़े और अन्न का दान करना शुभ है। किसी विकलांग या वृद्ध की सेवा करना भी शनि देव को प्रिय है।

पितृ तर्पण के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

16 मई को कुतुप मुहूर्त — दोपहर 11:36 बजे से 12:24 बजे तक — पितृ तर्पण के लिए सर्वोत्तम समय है। इस दौरान दक्षिण दिशा में मुख करके काले तिल और कुश से तर्पण करें।

क्या अधिक मास में अमावस्या अलग होती है?

हाँ। अधिक मास (17 मई से 15 जून 2026) की अमावस्या 14 जून को होगी — इसे ‘अधिक ज्येष्ठ अमावस्या’ कहते हैं और यह भगवान विष्णु की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम है।

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अमावस्या कैलेंडर: Amavasya 2026 Dates – सभी 12 अमावस्या

आरती: हनुमान आरती हिंदी में

एकादशी: Ekadashi 2026 List

त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026

व्रत कथा: एकादशी व्रत कथा

निष्कर्ष

शनि अमावस्या वह पावन दिन है जब श्रद्धा और कर्म — दोनों का संगम होता है। शनि देव न्यायकारी हैं — वे उन्हें दंड नहीं देते जो सच्चे मन से उनकी भक्ति करते हैं। इस दिन की पूजा, दान और पितृ तर्पण से जीवन में शांति, सुरक्षा और समृद्धि आती है।

ॐ शं शनैश्चराय नमः — शनि अमावस्या पर शनि देव की आराधना करें, उनकी कृपा पाएं।

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