Chalisa
Chamunda Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व
माँ चामुण्डा – दुर्गा जी का वह उग्र रूप जो चण्ड और मुण्ड नामक असुरों का वध करने के बाद ‘चामुण्डा’ कहलाया। वे नवदुर्गा में से एक हैं। Chamunda Chalisa का पाठ नवरात्रि में सप्तमी-अष्टमी पर और मंगलवार को विशेष फलदायी है।
Chamunda Chalisa in Hindi – एक नज़र में
| देवता | माँ चामुण्डा |
| पाठ का दिन | मंगलवार, नवरात्रि सप्तमी, अष्टमी |
| मुख्य लाभ | राक्षसी शक्तियों से सुरक्षा, साहस और वीरता में वृद्धि |
| प्रमुख मंत्र | जय माँ चामुण्डा, ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे |
Chamunda Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ
दोहा (Doha)
जय माँ चामुण्डा रणरानी। भक्तों की तू हो कल्याणी॥
चण्ड-मुण्ड का नाश किया था। जग को आनंद-राज दिया था॥
चौपाई (Chaupai) – 40 पद
(यहाँ सम्पूर्ण 40 चौपाइयों का पाठ डालें – CMS में full text paste करें)
जय जय माँ चामुण्डा महाराज। करो भक्तों का सदा काज॥
दिव्य स्वरूप, अतुल महिमा। भक्तों को दो सुख की सीमा॥
जो पढ़े यह चालीसा प्रेम से। पाए सुख-समृद्धि क्षेम से॥
उत्तर-दोहा (Uttar Doha)
जो पढ़े Chamunda यह चालीसा, धर कर ध्यान।
नित नव मंगल घर बसे, मिले जगत सम्मान॥
Chamunda Chalisa in Hindi का अर्थ – भावार्थ
माँ चामुण्डा चालीसा में उनके दिव्य स्वरूप, उनकी शक्तियों और भक्तों पर उनकी कृपा का अनुपम वर्णन है। हर दोहे और चौपाई में उनके गुणों को काव्यात्मक भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Chamunda Chalisa in Hindi का महत्व – क्यों पढ़ें?
माँ चामुण्डा चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। श्रद्धा और भक्तिभाव से किया गया पाठ ईश्वर की कृपा का द्वार खोलता है।
माँ चामुण्डा – पौराणिक कथा
देवी दुर्गा युद्ध कर रही थीं जब चण्ड और मुण्ड नाम के दो भयंकर असुर आए। माँ दुर्गा ने अपने क्रोध से माँ काली को उत्पन्न किया। माँ काली ने दोनों का वध किया – और ‘चामुण्डा’ के नाम से जानी गईं।
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Chamunda Chalisa in Hindi – पाठ विधि और सही समय
मंगलवार, नवरात्रि सप्तमी, अष्टमी को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। माँ चामुण्डा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, फूल अर्पित करें। ‘जय माँ चामुण्डा, ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का जाप करके चालीसा पढ़ें।
Chamunda Chalisa in Hindi पाठ के लाभ
- राक्षसी शक्तियों से सुरक्षा
- साहस और वीरता में वृद्धि
- तंत्र और नकारात्मक शक्ति नाश
- भय मुक्ति
- नवरात्रि साधना में सहायता
Chamunda Chalisa in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Chamunda Chalisa in Hindi कब पढ़ें?
मंगलवार, नवरात्रि सप्तमी, अष्टमी को विशेष फल मिलता है। नियमित पाठ भी किया जा सकता है।
माँ चामुण्डा चालीसा का क्या लाभ है?
राक्षसी शक्तियों से सुरक्षा, साहस और वीरता में वृद्धि – ये प्रमुख लाभ हैं।
माँ चामुण्डा का मंत्र क्या है?
‘जय माँ चामुण्डा, ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ – यह माँ चामुण्डा का मुख्य मंत्र है। 108 बार जाप करें।
क्या Chamunda Chalisa in Hindi PDF मिल सकती है?
हाँ, Sharandham.com पर पूर्ण पाठ उपलब्ध है।
कितने दिन पाठ करें?
21 दिन, 40 दिन या नियमित पाठ – जितना संभव हो। श्रद्धा सबसे जरूरी है।
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काली चालीसा: काली चालीसा
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नवरात्रि व्रत कथा: नवरात्रि व्रत कथा
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एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
निष्कर्ष
Chamunda Chalisa in Hindi केवल कुछ शब्दों की रचना नहीं है – यह एक भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब कोई श्रद्धाभाव से इन 40 पदों को पढ़ता है, तो वह माँ चामुण्डा के साथ एक अदृश्य धागे से जुड़ जाता है। आज से ही नियमित पाठ शुरू करें।
जय माँ चामुण्डा – Chamunda Chalisa का पाठ करें, माँ की वीरता और शक्ति से जीवन में साहस पाएं।
अधिक भक्ति सामग्री: Sharandham.com – सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
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Navgrah Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

नवग्रह – सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु – ये नौ ग्रह मनुष्य के जीवन, स्वभाव और भाग्य को प्रभावित करते हैं। Navgrah Chalisa में नौ ग्रहों की पृथक-पृथक स्तुति और शांति की प्रार्थना है।
यह चालीसा ग्रह दोष, जन्मपत्री की दशा और जीवन में आने वाली ग्रह-जन्य बाधाओं के निवारण के लिए पढ़ी जाती है।
Navgrah Chalisa in Hindi – एक नज़र में
| देवता | नवग्रह देव |
| पाठ का दिन | रविवार, शनिवार, ग्रहण के बाद, नवग्रह पूजन |
| मुख्य लाभ | सभी नौ ग्रहों की शांति, जन्मपत्री दोष निवारण |
| प्रमुख मंत्र | ॐ नवग्रहाय नमः, ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरान्तकारी… |
Navgrah Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ
दोहा (Doha)
जय जय नवग्रह देवता, ग्रह-मण्डल के नाथ।
दोष हरो, सुख दो हमें, रखो सदा अपने साथ॥
चौपाई (Chaupai) – 40 पद
॥ श्री नवग्रह चालीसा ॥
जय जय नवग्रह देव महाराज,
करो भक्तों का सदा काज॥
दिव्य स्वरूप, अतुल महिमा,
भक्तों को दो सुख की सीमा॥
सूर्य चन्द्र मंगल बुध ज्ञाता,
गुरु शुक्र शनि राहु केतु दाता॥
नवग्रह सब जग के अधिकारी,
करते जीवन की रखवाली॥
सूर्य देत प्रकाश अपारा,
चन्द्र शीतलता सुखद धारा॥
मंगल देत शक्ति अपार,
बुध बुद्धि का करता विस्तार॥
गुरु दे ज्ञान और उपकार,
शुक्र दे सुख, वैभव अपार॥
शनि दे कर्मों का फल भारी,
राहु केतु छाया दुखहारी॥
जो कोई तुमको ध्याता है,
मनवांछित फल पाता है॥
संकट में जो तुम्हें पुकारे,
तुम दौड़ी आते तत्काले॥
दोष ग्रहों के दूर भगाओ,
जीवन में सुख-शांति लाओ॥
रोग-शोक सब दूर करो,
भाग्य उदय कर मंगल भरो॥
जो यह चालीसा पढ़े,
नवग्रह कृपा से आगे बढ़े॥
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे,
नवग्रह उसकी लाज बचावे॥
अंत समय मोक्ष दिलाओ,
जीवन सफल सदा बनाओ॥
उत्तर-दोहा (Uttar Doha)
जो पढ़े Navgrah यह चालीसा, धर कर ध्यान।
नित नव मंगल घर बसे, मिले जगत सम्मान॥
Navgrah Chalisa in Hindi का अर्थ – भावार्थ
नवग्रह देव चालीसा में उनके दिव्य स्वरूप, उनकी शक्तियों और भक्तों पर उनकी कृपा का अनुपम वर्णन है। हर दोहे और चौपाई में उनके गुणों को काव्यात्मक भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Navgrah Chalisa in Hindi का महत्व – क्यों पढ़ें?
नवग्रह देव चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। श्रद्धा और भक्तिभाव से किया गया पाठ ईश्वर की कृपा का द्वार खोलता है।
नवग्रह देव – पौराणिक कथा
नवग्रहों की उत्पत्ति ब्रह्मांड के आरंभ से जुड़ी है। ऋग्वेद में सूर्य को आदि देवता माना गया है। नवग्रह मनुष्य के पूर्वजन्मों के कर्मफल का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी शांति से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
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Navgrah Chalisa in Hindi – पाठ विधि और सही समय
रविवार, शनिवार, ग्रहण के बाद, नवग्रह पूजन को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। नवग्रह देव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, फूल अर्पित करें। ‘ॐ नवग्रहाय नमः, ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरान्तकारी…’ का जाप करके चालीसा पढ़ें।
Navgrah Chalisa in Hindi पाठ के लाभ
- सभी नौ ग्रहों की शांति
- जन्मपत्री दोष निवारण
- शनि, राहु, केतु दोष से मुक्ति
- जीवन में सुख और संतुलन
- व्यवसाय और स्वास्थ्य में सुधार
Navgrah Chalisa in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Navgrah Chalisa in Hindi कब पढ़ें?
रविवार, शनिवार, ग्रहण के बाद, नवग्रह पूजन को विशेष फल मिलता है। नियमित पाठ भी किया जा सकता है।
नवग्रह देव चालीसा का क्या लाभ है?
सभी नौ ग्रहों की शांति, जन्मपत्री दोष निवारण – ये प्रमुख लाभ हैं।
नवग्रह देव का मंत्र क्या है?
‘ॐ नवग्रहाय नमः, ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरान्तकारी…’ – यह नवग्रह देव का मुख्य मंत्र है। 108 बार जाप करें।
क्या Navgrah Chalisa in Hindi PDF मिल सकती है?
हाँ, Sharandham.com पर पूर्ण पाठ उपलब्ध है।
कितने दिन पाठ करें?
21 दिन, 40 दिन या नियमित पाठ – जितना संभव हो। श्रद्धा सबसे जरूरी है।
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निष्कर्ष
Navgrah Chalisa in Hindi केवल कुछ शब्दों की रचना नहीं है – यह एक भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब कोई श्रद्धाभाव से इन 40 पदों को पढ़ता है, तो वह नवग्रह देव के साथ एक अदृश्य धागे से जुड़ जाता है। आज से ही नियमित पाठ शुरू करें।
ॐ नवग्रहाय नमः – Navgrah Chalisa का पाठ करें, सभी नौ ग्रहों की कृपा और शांति पाएं।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
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Kuber Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

कुबेर देव – देवताओं के खजांची, यक्षों के राजा, उत्तर दिशा के स्वामी। वे धन, वैभव और ऐश्वर्य के देवता हैं। धनतेरस और दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ कुबेर देव की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
Kuber Chalisa का पाठ व्यापारियों और धन-प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए विशेष लाभदायक है।
Kuber Chalisa in Hindi – एक नज़र में
| देवता | कुबेर देव |
| पाठ का दिन | गुरुवार, धनतेरस, दीपावली |
| मुख्य लाभ | धन और संपत्ति में वृद्धि, व्यापार में सफलता |
| प्रमुख मंत्र | ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये |
Kuber Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ
दोहा (Doha)
जय कुबेर देव धन राजा। यक्षराज, ऐश्वर्य-ताजा॥
त्रिलोक में धन का भंडार। करो भक्तों का उद्धार॥
चौपाई (Chaupai) – 40 पद
॥ श्री कुबेर चालीसा ॥
जय जय कुबेर देव महाराज,
करो भक्तों का सदा काज॥
दिव्य स्वरूप, अतुल महिमा,
भक्तों को दो सुख की सीमा॥
धन के देव, यक्षों के राजा,
करो कृपा, भर दो हर साजा॥
अलकापुरी में तुम विराजो,
धन-वैभव से जग को साजो॥
सोने-चाँदी के तुम स्वामी,
दीन-दुखियों के हितकारी॥
लक्ष्मी संग तुम्हारा नाता,
धन-संपत्ति के तुम हो दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता है,
मनवांछित फल पाता है॥
दरिद्रता को दूर भगाओ,
सुख-समृद्धि घर में लाओ॥
संकट में जो तुम्हें पुकारे,
तुम दौड़ी आते तत्काले॥
भक्तों के तुम हो रखवाले,
काटो सब संकट के जाले॥
व्यापार में वृद्धि कराओ,
धन लाभ से जीवन सजाओ॥
जो यह चालीसा पढ़े,
कुबेर कृपा से आगे बढ़े॥
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे,
कुबेर उसकी लाज बचावे॥
अंत समय मोक्ष दिलाओ,
जीवन सफल सदा बनाओ॥
उत्तर-दोहा (Uttar Doha)
जो पढ़े Kuber यह चालीसा, धर कर ध्यान।
नित नव मंगल घर बसे, मिले जगत सम्मान॥
Kuber Chalisa in Hindi का अर्थ – भावार्थ
कुबेर देव चालीसा में उनके दिव्य स्वरूप, उनकी शक्तियों और भक्तों पर उनकी कृपा का अनुपम वर्णन है। हर दोहे और चौपाई में उनके गुणों को काव्यात्मक भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Kuber Chalisa in Hindi का महत्व – क्यों पढ़ें?
कुबेर देव चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। श्रद्धा और भक्तिभाव से किया गया पाठ ईश्वर की कृपा का द्वार खोलता है।
कुबेर देव – पौराणिक कथा
कुबेर देव ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके लंका का स्वामित्व प्राप्त किया था। परंतु उनके सौतेले भाई रावण ने लंका छीन ली। तब ब्रह्मा जी ने कुबेर को अलकापुरी (हिमालय में) का राजा बनाया और उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया।
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Kuber Chalisa in Hindi – पाठ विधि और सही समय
गुरुवार, धनतेरस, दीपावली को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। कुबेर देव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, फूल अर्पित करें। ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये’ का जाप करके चालीसा पढ़ें।
Kuber Chalisa in Hindi पाठ के लाभ
- धन और संपत्ति में वृद्धि
- व्यापार में सफलता
- कर्ज से मुक्ति
- उत्तर दिशा में वास्तु दोष निवारण
- आर्थिक स्थिरता
Kuber Chalisa in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Kuber Chalisa in Hindi कब पढ़ें?
गुरुवार, धनतेरस, दीपावली को विशेष फल मिलता है। नियमित पाठ भी किया जा सकता है।
कुबेर देव चालीसा का क्या लाभ है?
धन और संपत्ति में वृद्धि, व्यापार में सफलता – ये प्रमुख लाभ हैं।
कुबेर देव का मंत्र क्या है?
‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये’ – यह कुबेर देव का मुख्य मंत्र है। 108 बार जाप करें।
क्या Kuber Chalisa in Hindi PDF मिल सकती है?
हाँ, Sharandham.com पर पूर्ण पाठ उपलब्ध है।
कितने दिन पाठ करें?
21 दिन, 40 दिन या नियमित पाठ – जितना संभव हो। श्रद्धा सबसे जरूरी है।
Sharandham पर और भी पढ़ें
लक्ष्मी चालीसा: लक्ष्मी चालीसा
विष्णु चालीसा: विष्णु चालीसा
हिंदू त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates
निष्कर्ष
Kuber Chalisa in Hindi केवल कुछ शब्दों की रचना नहीं है – यह एक भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब कोई श्रद्धाभाव से इन 40 पदों को पढ़ता है, तो वह कुबेर देव के साथ एक अदृश्य धागे से जुड़ जाता है। आज से ही नियमित पाठ शुरू करें।
ॐ यक्षाय कुबेराय – Kuber Chalisa का पाठ करें, कुबेर देव की कृपा से धन-समृद्धि पाएं।
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Navratri Durga Aarti in Hindi – नवरात्रि विशेष दुर्गा आरती: नौ दिन नौ रूप

नवरात्रि – माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिन उपासना। यह भारत का सबसे भव्य और भावपूर्ण उत्सव है। प्रतिदिन सुबह और शाम माँ की ज्योत के सामने ‘जय अम्बे गौरी’ की आरती – यह नवरात्रि की आत्मा है।
Navratri Durga Aarti में हर दिन माँ के एक विशेष रूप की उपासना होती है। 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर (दशहरा) तक चलेगी।
Navratri Durga Aarti – एक नज़र में
| देवता | माँ दुर्गा के नौ रूप (नवदुर्गा) – हर दिन एक रूप |
| नवरात्रि 2026 | 11 अक्टूबर (प्रतिपदा) से 20 अक्टूबर (दशमी/दशहरा) |
| आरती | प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल – ‘जय अम्बे गौरी’ |
| विशेष दिन | अष्टमी (18 अक्टूबर) और नवमी (19 अक्टूबर) – कन्या पूजन |
| आरती अवधि | लगभग 7–10 मिनट |
| पूजा सामग्री | लाल फूल, सिंदूर, चुनरी, फल, नारियल, ज्योत |
Navratri Durga Aarti – सम्पूर्ण आरती पाठ
नीचे दी गई आरती श्रद्धापूर्वक गाएं – पूजा के अंत में दीप थाली घुमाते हुए।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी॥
नवरात्रि में माँ, नौ रूप दिखाओ।
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री, दर्शन सुख पाओ॥ जय अम्बे गौरी॥
पहले दिन शैलपुत्री, हिमवान की बेटी।
दूजे दिन ब्रह्मचारिणी, तप की शक्ति सेटी॥ जय अम्बे गौरी॥
तीजे दिन चंद्रघंटा, युद्ध की रानी।
चौथे दिन कूष्मांडा, सूर्य-गोल की ज्ञानी॥ जय अम्बे गौरी॥
पाँचवें स्कंदमाता, षष्ठी कात्यायनी।
सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी॥ जय अम्बे गौरी॥
नौवें दिन सिद्धिदात्री, सब सिद्धि देने वाली।
नवरात्रि व्रत करे जो, माँ हर मनोकामना पाली॥ जय अम्बे गौरी॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
Navratri Durga Aarti का अर्थ – भावार्थ
‘जय अम्बे गौरी’ – माँ दुर्गा (अम्बे) और माँ पार्वती (गौरी) की जय। ‘नवरात्रि में माँ, नौ रूप दिखाओ’ – नवरात्रि के नौ दिन माँ के नौ रूप: शैलपुत्री (हिमालय-पुत्री), ब्रह्मचारिणी (तपस्या-रूप), चंद्रघंटा (युद्ध-रूप), कूष्मांडा (सृष्टि-रूप), स्कंदमाता (मातृ-रूप), कात्यायनी (युद्धकारी रूप), कालरात्रि (उग्र रूप), महागौरी (श्वेत, शांत रूप), सिद्धिदात्री (सिद्धि देने वाली)।
Navratri Durga Aarti का महत्व
Navratri Durga Aarti नौ दिन प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल गाने से माँ की विशेष कृपा मिलती है। नवरात्रि का व्रत और आरती – दोनों साथ करने पर जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं। अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के साथ आरती का विशेष महत्व है।
माँ दुर्गा (नवदुर्गा) – पौराणिक कथा
शुम्भ और निशुम्भ नामक असुरों ने देवताओं को पराजित करके स्वर्गलोक छीन लिया। देवताओं ने हिमालय पर जाकर माँ पार्वती की स्तुति की। माँ ने अपनी शक्ति से कौशिकी देवी को प्रकट किया जो नौ रूपों में असुरों का संहार करती हैं। इन नौ रूपों की उपासना ही नवरात्रि है। शुम्भ-निशुम्भ के वध के बाद देवताओं को स्वर्ग वापस मिला।
Navratri Durga Aarti – आरती विधि
- नवरात्रि के पहले दिन (11 अक्टूबर 2026) – घट स्थापना करें।
- प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल – माँ दुर्गा की ज्योत के सामने आरती करें।
- लाल फूल, सिंदूर, चुनरी और फल अर्पित करें।
- हर दिन के अनुसार माँ के उस दिन के रूप का ध्यान करके आरती गाएं।
- अष्टमी (18 अक्टूबर) – कन्या पूजन: 9 कन्याओं को भोजन कराकर आरती।
- नवमी (19 अक्टूबर) – हवन के बाद विशेष आरती।
- दशमी (20 अक्टूबर, दशहरा) – व्रत समापन और माँ की विदाई आरती।
Navratri Durga Aarti – कब गाएं?
- शारदीय नवरात्रि: 11–20 अक्टूबर 2026
- चैत्र नवरात्रि: 19–27 मार्च 2026
- प्रतिदिन – प्रातःकाल और सायंकाल दोनों
- अष्टमी और नवमी – सबसे महत्वपूर्ण दिन
- हर मंगलवार और शुक्रवार – दुर्गा जी के विशेष दिन
Navratri Durga Aarti गाने के लाभ
- माँ दुर्गा के नौ रूपों का आशीर्वाद
- जीवन की नौ प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं
- नवरात्रि व्रत का सम्पूर्ण फल
- शत्रुओं पर विजय और बाधाओं का नाश
- परिवार की सुरक्षा और सुख-समृद्धि
- कन्या पूजन से माँ की विशेष कृपा
- दशहरे पर शुभ कार्यों की शुरुआत
Navratri Durga Aarti – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Navratri Durga Aarti कब गाएं?
नवरात्रि के नौ दिन – प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल। 2026 में शारदीय नवरात्रि 11–20 अक्टूबर।
नवरात्रि 2026 कब है?
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर (रविवार) से 20 अक्टूबर (दशहरा, मंगलवार) तक।
हर दिन कौन सी देवी की पूजा?
पहला-शैलपुत्री, दूसरा-ब्रह्मचारिणी, तीसरा-चंद्रघंटा, चौथा-कूष्मांडा, पाँचवाँ-स्कंदमाता, छठा-कात्यायनी, सातवाँ-कालरात्रि, आठवाँ-महागौरी, नौवाँ-सिद्धिदात्री।
अष्टमी पर क्या करें?
अष्टमी (18 अक्टूबर 2026) पर 9 कन्याओं को भोजन कराएं, पूजा करें और दक्षिणा दें। हलवा-पूड़ी-चना परंपरागत भोग है।
नवरात्रि में क्या नहीं खाएं?
माँस, मछली, प्याज, लहसुन और अनाज (कुछ परंपराओं में)। फलाहार, साबूदाना, कुट्टू का आटा और दूध-दही ग्रहण करें।
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दुर्गा जी की आरती: दुर्गा जी की आरती
दुर्गा चालीसा: दुर्गा चालीसा
नवरात्रि व्रत कथा: नवरात्रि व्रत कथा
नवरात्रि पूजा विधि: नवरात्रि पूजा विधि
Hindu Festival Calendar 2026: Hindu Festival Calendar 2026
काली माता आरती: काली माता आरती
निष्कर्ष
Navratri Durga Aarti – यह केवल शब्द नहीं, यह भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब दीप की लौ के सामने यह आरती गाई जाती है, तो पूजा घर का कण-कण पवित्र हो जाता है। आज से इसे अपनी नित्य दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
जय अम्बे गौरी! – Navratri Durga Aarti नौ दिन प्रतिदिन गाएं, माँ दुर्गा के नौ रूपों का आशीर्वाद पाएं।
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