Aarti
Krishna Ji Ki Aarti in Hindi – आरती कुंज बिहारी की: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व
वृंदावन में सूर्यास्त के बाद जब ‘आरती कुंज बिहारी की’ के स्वर गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण राधा-कृष्ण की भक्ति से सराबोर हो जाता है। यह आरती भारत की सबसे मधुर और भक्तिपूर्ण आरतियों में से एक है।
Krishna Ji Ki Aarti – ‘आरती कुंज बिहारी की’ – भगवान कृष्ण की सायंकालीन आरती है। जन्माष्टमी पर रात 12 बजे जब कृष्ण जन्म होता है, यही आरती गाई जाती है।
Krishna Ji Ki Aarti – एक नज़र में
| देवता | भगवान श्री कृष्ण (कुंज बिहारी, गोविंद, माधव) |
| आरती का नाम | आरती कुंज बिहारी की |
| गाने का समय | सायंकाल – सूर्यास्त के बाद (वृंदावन परंपरा) |
| विशेष अवसर | जन्माष्टमी (रात 12 बजे), बुधवार, पूर्णिमा |
| आरती अवधि | लगभग 5–7 मिनट |
| आरती सामग्री | घी का दीप, माखन-मिश्री, पीले फूल, तुलसी, पान |
Krishna Ji Ki Aarti – सम्पूर्ण आरती पाठ
नीचे दी गई आरती श्रद्धापूर्वक गाएं – पूजा के अंत में दीप थाली घुमाते हुए।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
गले में बैजंती माला, बजावत मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला॥
गगन सम अंग कान्ति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसे, देवता दर्शन को तरसे।
ग्वाल-बाल संग भले, परम आनंद उर धारे॥
जहाँ ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हरिणी श्री गंगा।
स्मरण ते होत मोह भंगा, बसी शिव शीश जटा के संगा॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू।
चहुँ दिशि गोप ग्वाल धेनू, हँसत मृदु मनोहर वेणु॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
Krishna Ji Ki Aarti का अर्थ – भावार्थ
‘आरती कुंज बिहारी की’ – कुञ्ज (वन) में विहार करने वाले कृष्ण की आरती। ‘गिरिधर’ – गोवर्धन पर्वत उठाने वाले। ‘गले में बैजंती माला’ – वन-फूलों की माला। ‘मुरली मधुर बाला’ – मधुर बाँसुरी बजाने वाले। ‘ग्वाल-बाल संग’ – ग्वाल-मित्रों के साथ। ‘वृन्दावन बेनू’ – वृंदावन में बाँसुरी की धुन। यह आरती कृष्ण की संध्याकालीन लीला का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है।
Krishna Ji Ki Aarti का महत्व
Krishna Ji Ki Aarti – ‘आरती कुंज बिहारी की’ – वृंदावन की संध्या आरती की पद्धति पर आधारित है। इस आरती को गाने से मन वृंदावन की उस भक्तिमय वायु में पहुँच जाता है। जन्माष्टमी पर रात 12 बजे इस आरती का गायन करने से भगवान कृष्ण की विशेष कृपा मिलती है।
भगवान श्री कृष्ण – पौराणिक कथा
भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में कंस के कारागार में रात 12 बजे हुआ था। वसुदेव उन्हें यमुना पार करके गोकुल ले गए। गोकुल में बाल-लीलाएं, कालिया दमन, गोवर्धन उद्धार, रास-लीला – इन सभी लीलाओं का उल्लेख कृष्ण चरित्र में है। ‘आरती कुंज बिहारी की’ उन्हीं वृंदावन की लीलाओं का गुणगान है।
Krishna Ji Ki Aarti – आरती विधि
- सायंकाल – सूर्यास्त के बाद कृष्ण जी की संध्या पूजा करें।
- माखन, मिश्री और पंजीरी का भोग लगाएं।
- ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र जाप करके आरती गाएं।
- जन्माष्टमी पर रात ठीक 12 बजे अभिषेक और आरती करें।
- बुधवार को कृष्ण जी की पूजा विशेष फलदायी है।
Krishna Ji Ki Aarti – कब गाएं?
- जन्माष्टमी – रात 12 बजे (15 अगस्त 2026)
- बुधवार – प्रातः और सायंकाल
- प्रतिदिन संध्याकाल
- पूर्णिमा पर कृष्ण भजन-कीर्तन में
- रास-लीला और गोपाष्टमी पर
Krishna Ji Ki Aarti गाने के लाभ
- जीवन में आनंद और प्रेम का आगमन
- मन में भक्ति और राधा-कृष्ण प्रेम
- गीता के ज्ञान की प्रेरणा
- परिवार में प्रेम और सुख
- बच्चों के जीवन में संस्कार
- आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर
Krishna Ji Ki Aarti – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Krishna Ji Ki Aarti कब गाएं?
जन्माष्टमी पर रात 12 बजे। बुधवार और पूर्णिमा पर। प्रतिदिन संध्याकाल भी।
‘कुंज बिहारी’ का क्या अर्थ है?
‘कुञ्ज’ माने वन-उपवन और ‘बिहारी’ माने विहार करने वाले – यानी वन में विहार करने वाले कृष्ण।
जन्माष्टमी पर आरती कैसे करें?
रात ठीक 12 बजे – जन्म के समय – कृष्ण जी का पंचामृत अभिषेक करें, श्रृंगार करें, माखन-मिश्री का भोग लगाएं और ‘आरती कुंज बिहारी की’ गाएं।
क्या राधा जी की पूजा के साथ कृष्ण आरती गाएं?
हाँ। राधा-कृष्ण साथ पूजे जाते हैं। पहले राधा जी को नमन करें, फिर कृष्ण जी की आरती गाएं।
‘आरती कुंज बिहारी की’ किसने लिखी?
यह आरती भारतीय वैष्णव परंपरा में वृंदावन के संतों द्वारा रचित है। इसे मथुरा-वृंदावन में सायंकाल आरती के रूप में गाया जाता है।
Sharandham पर और भी पढ़ें
कृष्ण चालीसा: कृष्ण चालीसा
राधा चालीसा: राधा चालीसा
विष्णु जी की आरती: विष्णु जी की आरती
पूर्णिमा 2026: पूर्णिमा 2026
एकादशी 2026: एकादशी 2026
निष्कर्ष
Krishna Ji Ki Aarti – यह केवल एक गीत नहीं है। जब भक्त श्रद्धाभाव से दीप थाली घुमाते हैं और भगवान श्री कृष्ण की स्तुति गाते हैं, तो एक अलौकिक संबंध जुड़ता है – भक्त और भगवान के बीच। आज से प्रतिदिन यह आरती गाएं।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण – Krishna Ji Ki Aarti गाएं, कुंज बिहारी की कृपा से जीवन में प्रेम और आनंद पाएं।
अधिक भक्ति सामग्री: Sharandham.com – आरती, चालीसा, कथा और पूजा विधि।
Aarti
Baglamukhi Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

माँ बगलामुखी – दस महाविद्याओं में से एक, शत्रु-स्तंभन और वाक्-सिद्धि की देवी। पीत (पीले) रंग से इनकी पूजा होती है। Baglamukhi Chalisa उन लोगों के लिए विशेष है जो शत्रुओं से परेशान हों, कोर्ट-केस में फँसे हों, या किसी की बुरी शक्ति से पीड़ित हों।
Baglamukhi Chalisa in Hindi – एक नज़र में
| देवता | माँ बगलामुखी |
| पाठ का दिन | मंगलवार, शुक्रवार, एकादशी |
| मुख्य लाभ | शत्रु स्तंभन – दुश्मनों की शक्ति रोकना, वाक्-सिद्धि – बोले हुए शब्द सच होते हैं |
| प्रमुख मंत्र | ॐ ह्रीं बगलामुख्यै नमः |
Baglamukhi Chalisa in Hindi – सम्पूर्ण पाठ
दोहा (Doha)
जय माँ बगलामुखी भवानी। शत्रु-स्तम्भन की महारानी॥
पीत वस्त्रा, पीत आसन सोहे। भक्तों के मन को मोहे॥
चौपाई (Chaupai) – 40 पद
॥ श्री बगलामुखी चालीसा ॥
जय जय माँ बगलामुखी महाराज,
करो भक्तों का सदा काज॥
दिव्य स्वरूप, अतुल महिमा,
भक्तों को दो सुख की सीमा॥
पीताम्बरा, शुभ्र स्वरूपा,
दुष्टनाशिनी, महा अनूपा॥
शत्रु-वाणी स्तंभित कर देती,
भक्तों की रक्षा तुम करती॥
दशमहाविद्या में तुम न्यारी,
करती संकट हरण भारी॥
पीत वस्त्र, कमल आसन धारी,
भक्तों की तुम हो रखवाली॥
जो कोई तुमको ध्याता है,
मनवांछित फल पाता है॥
संकट में जो तुम्हें पुकारे,
तुम दौड़ी आती तत्काले॥
दीन-दुखियों की तुम सहारा,
करती सबका उद्धारा॥
रोग-शोक सब दूर भगाओ,
सुख-समृद्धि घर में लाओ॥
अज्ञान अंधेरा दूर करो,
ज्ञान का दीप भरपूर करो॥
भक्ति, शक्ति, बुद्धि प्रदानो,
जीवन पथ को सरल बनाओ॥
जो यह चालीसा पढ़े,
माँ कृपा से आगे बढ़े॥
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे,
माँ उसकी लाज बचावे॥
अंत समय मोक्ष दिलाओ,
जीवन सफल सदा बनाओ॥
उत्तर-दोहा (Uttar Doha)
जो पढ़े Baglamukhi यह चालीसा, धर कर ध्यान।
नित नव मंगल घर बसे, मिले जगत सम्मान॥
Baglamukhi Chalisa in Hindi का अर्थ – भावार्थ
माँ बगलामुखी चालीसा में उनके दिव्य स्वरूप, उनकी शक्तियों और भक्तों पर उनकी कृपा का अनुपम वर्णन है। हर दोहे और चौपाई में उनके गुणों को काव्यात्मक भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Baglamukhi Chalisa in Hindi का महत्व – क्यों पढ़ें?
माँ बगलामुखी चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। श्रद्धा और भक्तिभाव से किया गया पाठ ईश्वर की कृपा का द्वार खोलता है।
माँ बगलामुखी – पौराणिक कथा
एक बार ब्रह्मांड में भयंकर आंधी-तूफान आया जो सब कुछ नष्ट करने वाला था। देवताओं ने हरिद्रा सरोवर के तट पर माँ आदिशक्ति की आराधना की। माँ बगलामुखी प्रकट हुईं और अपने हाथ से उस तूफान को थाम लिया – यही उनकी ‘स्तंभन शक्ति’ है।
सम्पूर्ण आरती और पूजा सामग्री: Sharandham.com
Baglamukhi Chalisa in Hindi – पाठ विधि और सही समय
मंगलवार, शुक्रवार, एकादशी को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। माँ बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, फूल अर्पित करें। ‘ॐ ह्रीं बगलामुख्यै नमः’ का जाप करके चालीसा पढ़ें।
Baglamukhi Chalisa in Hindi पाठ के लाभ
- शत्रु स्तंभन – दुश्मनों की शक्ति रोकना
- वाक्-सिद्धि – बोले हुए शब्द सच होते हैं
- कोर्ट-केस में विजय
- तंत्र-बाधा से रक्षा
- विरोधियों का दमन
Baglamukhi Chalisa in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Baglamukhi Chalisa in Hindi कब पढ़ें?
मंगलवार, शुक्रवार, एकादशी को विशेष फल मिलता है। नियमित पाठ भी किया जा सकता है।
माँ बगलामुखी चालीसा का क्या लाभ है?
शत्रु स्तंभन – दुश्मनों की शक्ति रोकना, वाक्-सिद्धि – बोले हुए शब्द सच होते हैं – ये प्रमुख लाभ हैं।
माँ बगलामुखी का मंत्र क्या है?
‘ॐ ह्रीं बगलामुख्यै नमः’ – यह माँ बगलामुखी का मुख्य मंत्र है। 108 बार जाप करें।
क्या Baglamukhi Chalisa in Hindi PDF मिल सकती है?
हाँ, Sharandham.com पर पूर्ण पाठ उपलब्ध है।
कितने दिन पाठ करें?
21 दिन, 40 दिन या नियमित पाठ – जितना संभव हो। श्रद्धा सबसे जरूरी है।
Sharandham पर और भी पढ़ें
काली चालीसा: काली चालीसा
चामुण्डा चालीसा: चामुण्डा चालीसा
दुर्गा चालीसा: दुर्गा चालीसा
त्योहार कैलेंडर: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
निष्कर्ष
Baglamukhi Chalisa in Hindi केवल कुछ शब्दों की रचना नहीं है – यह एक भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब कोई श्रद्धाभाव से इन 40 पदों को पढ़ता है, तो वह माँ बगलामुखी के साथ एक अदृश्य धागे से जुड़ जाता है। आज से ही नियमित पाठ शुरू करें।
ॐ ह्रीं बगलामुख्यै नमः – Baglamukhi Chalisa का पाठ करें, माँ की शक्ति से शत्रु पर विजय पाएं।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
Aarti
Somvar Vrat Aarti in Hindi – सोमवार व्रत शिव आरती: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

सोमवार – भगवान शिव का सबसे प्रिय दिन। ‘सोम’ माने चंद्रमा – और शिव जी के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है इसीलिए सोमवार उनका दिन है। हर सोमवार उपवास रखना और शिव जी की आरती गाना – यह करोड़ों शिवभक्तों की दिनचर्या है।
Somvar Vrat Aarti – ‘जय शिव ओंकारा’ – सोमवार व्रत की आत्मा है। श्रावण मास के सोमवार और 16 सोमवार व्रत में यह आरती विशेष रूप से फलदायी है।
Somvar Vrat Aarti – एक नज़र में
| देवता | भगवान शिव (महादेव, भोलेनाथ, शंकर, सोमनाथ) |
| आरती का नाम | जय शिव ओंकारा – सोमवार व्रत आरती |
| गाने का समय | सोमवार – प्रातःकाल शिव अभिषेक के बाद |
| विशेष अवसर | श्रावण सोमवार, 16 सोमवार व्रत, प्रदोष |
| आरती अवधि | लगभग 7–8 मिनट |
| आरती सामग्री | बेलपत्र, गंगाजल, दूध, धतूरा, भाँग, घी का दीप |
Somvar Vrat Aarti – सम्पूर्ण आरती पाठ
नीचे दी गई आरती श्रद्धापूर्वक गाएं – पूजा के अंत में दीप थाली घुमाते हुए।
जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, करत नित नारी॥ जय शिव ओंकारा॥
श्रावण सोमवार को, भक्त व्रत रखते।
बेलपत्र जलाभिषेक, शिव-कृपा पाते॥ जय शिव ओंकारा॥
सोलह सोमवार को, पूजा करें जो।
मनवांछित पति-वर पाएं, सुख से रहें तो॥ जय शिव ओंकारा॥
जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥
Somvar Vrat Aarti का अर्थ – भावार्थ
‘जय शिव ओंकारा’ – ओंकार (ॐ) स्वरूप शिव की जय। ‘ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा’ – शिव त्रिदेवों के मूल हैं और माँ पार्वती (अर्धांगी) उनके साथ। ‘एकानन’ – एक मुख (शिव का साधारण रूप), ‘चतुरानन’ – चार मुख (ब्रह्मा), ‘पंचानन’ – पाँच मुख (शिव का पंचमुखी रूप)। ‘वृषवाहन’ – नंदी बैल पर सवार। ‘श्रावण सोमवार को, बेलपत्र जलाभिषेक’ – श्रावण में जल और बेलपत्र से शिव अभिषेक अत्यंत प्रिय है। ‘सोलह सोमवार’ – 16 सोमवार व्रत से मनचाहा वर या सुख मिलता है।
Somvar Vrat Aarti का महत्व
Somvar Vrat Aarti सोमवार व्रत का अनिवार्य अंग है। भगवान शिव ‘भोले’ हैं – वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और जल्दी वर देते हैं। सोमवार को शिवलिंग का अभिषेक और ‘जय शिव ओंकारा’ आरती गाने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। कुँवारी कन्याएं 16 सोमवार व्रत रखती हैं – इससे मनचाहा वर मिलता है।
भगवान शिव – पौराणिक कथा
16 सोमवार व्रत की कथा – एक राजा-रानी अमरावती नगरी में रहते थे। एक बार शिव-पार्वती उनके बगीचे में विराजे। माँ पार्वती ने शिव जी के साथ चौपड़ खेला और राजा से पूछा – ‘बताओ, कौन जीतेगा?’ राजा ने झूठ बोलकर माँ पार्वती को विजेता बता दिया। पार्वती जी ने खुश होकर राजा को 16 सोमवार व्रत का विधान बताया। राजा ने व्रत किया और उसके जीवन में सब मनोकामनाएं पूरी हुईं। तभी से 16 सोमवार व्रत की परंपरा चली।
Somvar Vrat Aarti – आरती विधि
- सोमवार को प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- शिव मंदिर जाएं – या घर पर शिवलिंग स्थापित करें।
- गंगाजल, दूध, दही, शहद और गुलाबजल से शिव अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भाँग और सफेद फूल अर्पित करें।
- ‘ओम नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करें।
- घी का दीप जलाकर ‘जय शिव ओंकारा’ आरती गाएं।
- दिन में एकल भोजन या फलाहार – शाम को व्रत खोलें।
Somvar Vrat Aarti – कब गाएं?
- हर सोमवार – नियमित व्रत
- श्रावण मास के सोमवार – विशेष महत्व (जुलाई-अगस्त)
- 16 सोमवार व्रत – लगातार 16 सोमवार
- महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) – सबसे बड़ा शिव पर्व
- प्रदोष व्रत – हर महीने त्रयोदशी को
Somvar Vrat Aarti गाने के लाभ
- मनचाहे वर या वधु की प्राप्ति – 16 सोमवार व्रत से
- वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम
- संतान सुख और परिवार में खुशहाली
- रोग और कष्टों से मुक्ति
- शिव-पार्वती का विशेष आशीर्वाद
- मन में शांति और जीवन में सौभाग्य
- श्रावण सोमवार व्रत से पुण्य का विशेष लाभ
Somvar Vrat Aarti – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Somvar Vrat Aarti कब गाएं?
हर सोमवार – शिव अभिषेक के बाद। श्रावण मास के सोमवार पर विशेष।
16 सोमवार व्रत कैसे करें?
16 लगातार सोमवार शिव जी का व्रत, पूजा, कथा-श्रवण और आरती। अंत में उद्यापन पूजा।
सोमवार व्रत में क्या खाएं?
दिन में एक बार – सात्त्विक भोजन। फलाहार भी कर सकते हैं। नमक का उपयोग परंपरा के अनुसार।
शिव जी को बेलपत्र क्यों चढ़ाएं?
बेलपत्र (बिल्वपत्र) शिव जी को सबसे प्रिय है। शास्त्रों में कहा – एक बेलपत्र चढ़ाने से 1000 कमल चढ़ाने का फल मिलता है।
श्रावण सोमवार 2026 कब हैं?
2026 में श्रावण मास जुलाई-अगस्त में है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार शिव पूजा का विशेष महत्व है।
Sharandham पर और भी पढ़ें
शिव चालीसा: शिव चालीसा
सोमवार व्रत कथा: सोमवार व्रत कथा
हिंदू त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates
गंगा माता की आरती: गंगा माता की आरती
निष्कर्ष
Somvar Vrat Aarti – यह केवल शब्द नहीं, यह भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब दीप की लौ के सामने यह आरती गाई जाती है, तो पूजा घर का कण-कण पवित्र हो जाता है। आज से इसे अपनी नित्य दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
ओम नमः शिवाय! – Somvar Vrat Aarti हर सोमवार गाएं, भोलेनाथ की कृपा से जीवन में शांति और मनोकामना पूरी हो।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
Aarti
Ekadashi Aarti in Hindi – एकादशी पूजन आरती: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

एकादशी – भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तिथि। हर माह दो बार आने वाली यह तिथि भक्ति और व्रत का अनुपम अवसर है। एकादशी पर सारी रात जागरण करके ‘ओम जय जगदीश हरे’ गाना – यही विष्णु भक्तों की सबसे बड़ी साधना है।
Ekadashi Aarti – एकादशी व्रत का अनिवार्य और सबसे पवित्र अंग है। व्रत के दिन रात्रि में और पारण से ठीक पहले यह आरती गाने से पूर्ण फल मिलता है।
Ekadashi Aarti – एक नज़र में
| देवता | भगवान विष्णु (श्री हरि, नारायण, जगदीश) |
| आरती | ओम जय जगदीश हरे – एकादशी विशेष |
| व्रत | हर माह दो एकादशी – साल 2026 में 26 एकादशी |
| गाने का समय | एकादशी व्रत के दिन – रात्रि जागरण में और पारण से पहले |
| पारण | अगले दिन द्वादशी तिथि में – सूर्योदय के बाद |
| विशेष | देवशयनी (25 जुलाई), निर्जला (25 जून), मोक्षदा (20 दिसंबर) एकादशी |
Ekadashi Aarti – सम्पूर्ण आरती पाठ
नीचे दी गई आरती श्रद्धापूर्वक गाएं – पूजा के अंत में दीप थाली घुमाते हुए।
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे॥
एकादशी के दिन प्रभु, व्रत करें भक्त।
रात जागरण करते हैं, भजन करते अनुरक्त॥ ओम जय जगदीश हरे॥
तुलसी दल प्रिय तुम्हें, पंचामृत चढ़ाएं।
चावल त्याग करके हम, पारण सुखी पाएं॥ ओम जय जगदीश हरे॥
देवशयनी से देव उठनी, चातुर्मास काल।
निर्जला एकादशी में, मिले सारा फल॥ ओम जय जगदीश हरे॥
मोक्षदा एकादशी पर, गीता जयंती मनाएं।
वैकुंठ द्वार खुलता है, हरि-भक्ति दिखाएं॥ ओम जय जगदीश हरे॥
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
Ekadashi Aarti का अर्थ – भावार्थ
‘ओम जय जगदीश हरे’ – जगत के ईश, श्री हरि की जय। ‘एकादशी के दिन प्रभु, व्रत करें भक्त’ – एकादशी व्रत विष्णु जी को समर्पित। ‘तुलसी दल प्रिय’ – बिना तुलसी के विष्णु पूजा अधूरी। ‘चावल त्याग करके’ – एकादशी पर चावल वर्जित है। ‘देवशयनी से देव उठनी, चातुर्मास’ – इन चार महीनों में विष्णु जी योगनिद्रा में जाते हैं। ‘निर्जला एकादशी में मिले सारा फल’ – यह सर्वश्रेष्ठ एकादशी है। ‘मोक्षदा एकादशी पर गीता जयंती’ – इसी दिन भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।
Ekadashi Aarti का महत्व
Ekadashi Aarti एकादशी व्रत का समापन है। रात्रि जागरण में इस आरती को गाने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। 2026 में 26 एकादशियाँ हैं – इनमें से निर्जला (25 जून), देवशयनी (25 जुलाई) और मोक्षदा (20 दिसंबर) सबसे महत्वपूर्ण हैं।
भगवान विष्णु – पौराणिक कथा
एकादशी व्रत की उत्पत्ति की कथा पद्म पुराण में है। एक बार मुर नामक दानव ने देवलोक पर कब्जा किया। भगवान विष्णु उससे युद्ध करते-करते एक गुफा में सो गए। उनकी शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जिसने मुर का वध किया। यह शक्ति एकादशी तिथि को प्रकट हुई थी – इसीलिए इस तिथि का नाम ‘एकादशी’ और यह भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तिथि बनी।
Ekadashi Aarti – आरती विधि
- एकादशी के दिन सूर्योदय से व्रत शुरू करें।
- भगवान विष्णु की पूजा – तुलसी, पंचामृत, पीले फूल अर्पित करें।
- दिन में ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें।
- रात्रि जागरण – भजन, कीर्तन और एकादशी कथा का श्रवण।
- ‘ओम जय जगदीश हरे’ और ‘एकादशी आरती’ गाएं।
- अगले दिन द्वादशी में – पारण से पहले आरती करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर पारण करें।
Ekadashi Aarti – कब गाएं?
- हर एकादशी – महीने में दो बार (साल में 26 बार – 2026 में)
- निर्जला एकादशी (25 जून 2026) – सर्वश्रेष्ठ
- देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026) – चातुर्मास शुरू
- देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) – चातुर्मास समाप्त
- मोक्षदा एकादशी (20 दिसंबर 2026) – गीता जयंती
Ekadashi Aarti गाने के लाभ
- सभी एकादशियों का सम्पूर्ण फल
- मोक्ष का मार्ग – एकादशी व्रत से वैकुंठ प्राप्ति
- पापों का नाश और आत्मशुद्धि
- परिवार में सुख और विष्णु जी की कृपा
- रात्रि जागरण से विशेष पुण्य-प्राप्ति
- 26 एकादशियाँ – 26 गुना पुण्य (2026 में)
Ekadashi Aarti – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Ekadashi Aarti कब गाएं?
एकादशी के दिन – विशेषतः रात्रि जागरण में। पारण से पहले भी आरती करें।
एकादशी में चावल क्यों नहीं खाते?
शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल में ब्राह्मण-तत्व का वास होता है – इसे खाने से पाप लगता है और व्रत का फल नष्ट होता है।
2026 में सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन सी है?
निर्जला एकादशी (25 जून) – जो सभी एकादशियों का फल देती है। मोक्षदा एकादशी (20 दिसंबर) – गीता जयंती – भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एकादशी पर रात्रि जागरण क्यों?
रात जागकर भजन-कीर्तन और आरती करने से विष्णु जी प्रसन्न होते हैं और व्रत का कई गुना फल मिलता है।
पारण का सही समय क्या है?
अगले दिन द्वादशी तिथि में – सूर्योदय के बाद हरि वासर समाप्ति के पश्चात। पारण का समय पंचांग में देखें।
Sharandham पर और भी पढ़ें
एकादशी 2026 सम्पूर्ण सूची: एकादशी 2026 सम्पूर्ण सूची
विष्णु जी की आरती: विष्णु जी की आरती
एकादशी व्रत कथा: एकादशी व्रत कथा
सत्यनारायण भगवान की आरती: सत्यनारायण भगवान की आरती
विष्णु चालीसा: विष्णु चालीसा
पूर्णिमा 2026: पूर्णिमा 2026
निष्कर्ष
Ekadashi Aarti – यह केवल शब्द नहीं, यह भक्त का अपने आराध्य से संवाद है। जब दीप की लौ के सामने यह आरती गाई जाती है, तो पूजा घर का कण-कण पवित्र हो जाता है। आज से इसे अपनी नित्य दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
ओम जय जगदीश हरे! – Ekadashi Aarti हर एकादशी पर गाएं, भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष का मार्ग मिले।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
-
Temples7 months agoकालकाजी मंदिर (Kalkaji Mandir) – इतिहास, दर्शन समय, महत्व और पूरी जानकारी
-
Temples7 months agoहनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस (Hanuman Mandir, Connaught Place) – इतिहास, महत्व और दर्शनीय जानकारी
-
Temples7 months agoलखनऊ के टॉप 10 प्रसिद्ध हिंदू मंदिर | Top 10 Best Hindu Temples in Lucknow to Visit (2026)
-
Aarti7 months agoSai Baba Aarti Lyrics in Hindi: आरती, महत्व, और पूजा विधि
-
Temples7 months agoफरीदाबाद के टॉप मंदिरों की सूची | आरती समय, दर्शन व पता | Top Mandir List of Faridabad
-
Chalisa7 months agoShree Hanuman Chalisa – श्री हनुमान चालीसा: Full Lyrics, Meaning & Benefits
-
Aarti7 months agoहनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti in Hindi) – Lyrics, Meaning & Benefits
-
Temples7 months agoनोएडा के Top 10 प्रसिद्ध मंदिर | Noida Mandir List with Timings, Aarti & Location

You must be logged in to post a comment Login