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कालाष्टमी 2025: जानें कौन-सा उपाय बदल सकता है आपकी किस्मत!

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Kalashtami 2025: काल भैरव की कृपा जल्दी पाने के उपाय | Kaal Bhairav Puja Tips & Remedies

हर महीने आने वाली कालाष्टमी को काले ब्रह्मा यानी भगवान काल भैरव की विशेष तिथि माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन किए गए भैरव पूजन, मंत्र-जप और उपाय तुरंत फल देते हैं और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।

Kalashtami 2025: काल भैरव की कृपा जल्दी पाने के उपाय | Kaal Bhairav Puja Tips & Remedies

कालाष्टमी 2025 में शुभ योग बन रहे हैं, जो इसे और भी शक्तिशाली बनाता है।
आइए जानें—कौन-सा उपाय आपकी किस्मत बदल सकता है!

कालाष्टमी 2025 की तिथि व शुभ मुहूर्त

विवरणसमय/दिन
तिथि11 दिसंबर 2025 (गुरुवार)
अष्टमी प्रारंभ11 दिसंबर, सुबह ___ बजे (आप चाहें तो मैं सटीक समय भी जोड़ दूँ)
अष्टमी समाप्त12 दिसंबर, सुबह ___ बजे
रात्रि पूजा का श्रेष्ठ समयमध्यरात्रि 12:00 – 2:00 बजे

Also Read: Kalashtami December 2025: तिथि, पूजा विधि, महत्व

क्यों माना जाता है कालाष्टमी इतना प्रभावशाली?

  • काल भैरव समय (काल) के स्वामी हैं।
  • नकारात्मक ऊर्जा, बाधा, नजर और भय का नाश करते हैं।
  • शत्रु बाधा, व्यवसाय रुकावट और मानसिक तनाव दूर होता है।
  • भैरव बाबा अत्यंत जल्दी प्रसन्न होते हैं।

वह उपाय जो बदल सकता है आपकी किस्मत! (Most Powerful Remedy)

1. “ॐ कालभैरवाय नमः” का 108 बार जप

यह मंत्र कर्म बाधाएँ और रुकावटें हटाता है।
कहा गया है कि इसका जप जीवन में प्रगति के रास्ते खोल देता है।

Also read: कालाष्टमी पर किन उपायों से जल्दी मिलती है काल भैरव की कृपा?

कालाष्टमी 2025 के 7 चमत्कारी उपाय (7 Powerful Remedies)

1. सरसों के तेल का दीपक जलाना

  • भैरव बाबा को सरसों का तेल अत्यंत प्रिय है।
  • इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

2. काले कुत्ते को रोटी खिलाना

  • भैरव स्वामी का वाहन “स्वान” माना गया है।
  • इससे दुर्भाग्य, ग्रह बाधा और अचानक होने वाले नुकसान कम होते हैं।

3. नींबू-मिर्च का टोटका

  • रात 12 बजे 1 नींबू व 7 मिर्च लेकर चौराहे पर रख दें।
  • मान्यता: इससे नजर दोष और बाधा कटती है।

4. तेल-रोली का चोला चढ़ाना

  • हनुमान जी की तरह काल भैरव पर भी चोला चढ़ाने का विशेष महत्व है।

5. 33 बार भैरव स्तुति पढ़ें

  • “कालभैरव अष्टकम” का पाठ अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

6. काले तिल का दान

  • कष्टों और ग्रहों से मुक्ति देता है।

7. कुत्तों को दूध/ब्रेड खिलाएँ

  • भैरव बाबा की कृपा तुरंत प्राप्त होती है।

कालाष्टमी पर क्या न करें? (Avoid These Mistakes)

  • शराब, मांसाहार, नशा
  • किसी से अपमानजनक बातें
  • रात जागरण के समय गुस्सा या तर्क-वितर्क
  • दान न करना (कालाष्टमी पर दान बहुत फलदायी होता है)

कालाष्टमी 2025: रात्रि जागरण क्यों शुभ है?

  • यह समय भैरव बाबा का प्राकृतिक काल माना जाता है।
  • इस दौरान किए गए उपाय और प्रार्थना शक्तिशाली फल देते हैं।
  • ध्यान और जप से मन स्पष्ट होता है और आशीर्वाद मिलता है।

Also read: कालाष्टमी दिसंबर 2025: क्यों माना जाता है यह रात्रि जागरण बेहद शुभ?

भैरव बाबा के आशीर्वाद से क्या लाभ होंगे?

  • अचानक धन हानि रुकती है
  • व्यापार/नौकरी में वृद्धि
  • नजरदोष और बाधाएँ खत्म
  • परिवार में शांति
  • जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा

कालाष्टमी 2025 आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सुनहरा अवसर है।
यदि आप ऊपर बताए गए उपाय श्रद्धा से कर लें, तो किस्मत का द्वार खुल सकता है और जीवन में नई ऊर्जा का अनुभव होता है।

Sharandham पर और भी पढ़ें

आरती: हनुमान जी की आरती

चालीसा: श्री हनुमान चालीसा

व्रत कथा: Hanuman Katha in Hindi

चालीसा: विष्णु चालीसा हिंदी में

Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह

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गुरु पूर्णिमा 2026: महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

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गुरु पूर्णिमा 2026

गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के सम्मान, श्रद्धा और आशीर्वाद को समर्पित माना जाता है। सनातन परंपरा में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है क्योंकि गुरु ही जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था।

इस पावन अवसर पर लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं, आशीर्वाद लेते हैं और आध्यात्मिक साधना करते हैं। आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि, मंत्र और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य।

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में गुरु को ज्ञान का स्रोत माना गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व शिष्य और गुरु के पवित्र संबंध को दर्शाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु की पूजा और सेवा करने से जीवन में सफलता, ज्ञान और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

यह पर्व विद्यार्थियों, साधकों और आध्यात्मिक लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास जी की पूजा भी की जाती है, जिन्होंने वेदों और पुराणों का ज्ञान दुनिया को दिया।

गुरु पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – (अपडेट अनुसार जोड़ें)
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – (अपडेट अनुसार जोड़ें)
  • पूजा का शुभ समय – सुबह ब्रह्म मुहूर्त और शाम का समय शुभ माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा पूजा सामग्री

पूजा के लिए निम्न सामग्री तैयार रखें:

  • गुरु या महर्षि वेदव्यास जी की तस्वीर
  • फूल और माला
  • धूप और दीपक
  • चंदन
  • अक्षत
  • मिठाई और फल
  • गंगाजल
  • पीले वस्त्र
  • प्रसाद

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

1. सुबह स्नान करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

2. पूजा स्थल तैयार करें

घर के मंदिर या साफ स्थान पर गुरु या वेदव्यास जी की तस्वीर स्थापित करें।

3. दीपक और धूप जलाएं

घी का दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें।

4. गुरु पूजन करें

गुरु की तस्वीर पर चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

गुरु मंत्र:

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”

6. आरती और प्रसाद

पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?

  • गुरु का आशीर्वाद लें
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
  • दान और सेवा करें
  • ध्यान और साधना करें

गुरु पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • गुरु का अपमान न करें
  • क्रोध और विवाद से बचें
  • गलत शब्दों का प्रयोग न करें
  • नकारात्मक सोच से दूर रहें

गुरु पूर्णिमा पूजा के लाभ

  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है
  • जीवन में सफलता प्राप्त होती है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • गुरु कृपा प्राप्त होती है
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है

गुरु पूर्णिमा FAQ

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा गुरु के सम्मान और महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में मनाई जाती है।

गुरु पूर्णिमा पर किसकी पूजा की जाती है?

इस दिन गुरु, महर्षि वेदव्यास और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

गुरु पूर्णिमा पर कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः…” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा का क्या महत्व है?

यह दिन ज्ञान, आध्यात्मिकता और गुरु कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है।

क्या गुरु पूर्णिमा पर व्रत रखा जाता है?

हाँ, कई लोग इस दिन व्रत रखकर पूजा और साधना करते हैं।

Sharandham पर और भी पढ़ें

पूर्णिमा से जुड़ी भक्ति सामग्री

कथा: श्री सत्यनारायण कथा

आरती: माँ लक्ष्मी की आरती

चालीसा: विष्णु चालीसा हिंदी में

पूजा विधि: सत्यनारायण पूजा विधि

अन्य तिथि कैलेंडर

एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List – सभी 26 एकादशी तारीख

अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates – सभी 13 अमावस्या तारीख

त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026

निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप और गुरु सेवा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है।

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Ekadashi 2026 List – सभी 26 एकादशी व्रत की तारीख, नाम और महत्व

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Ekadashi 2026 List

हिंदू पंचांग में एकादशी उस तिथि को कहते हैं जो हर चंद्र माह में दो बार आती है — एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। यानी साल में 24 एकादशियाँ होती हैं। लेकिन वर्ष 2026 में अधिक मास (अधिक ज्येष्ठ) के कारण दो अतिरिक्त एकादशियाँ और जुड़ जाती हैं — जिससे इस साल कुल 26 एकादशियाँ हैं।

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक एकादशी का व्रत करता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों और सौ राजसूय यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। एकादशी केवल उपवास नहीं है — यह मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का दिन है।

इस पृष्ठ पर आपको मिलेगी 2026 की सभी 26 एकादशियों की सम्पूर्ण सूची — तारीख, नाम, पक्ष, और हर एकादशी का विशेष महत्व।

Ekadashi 2026 – एक नज़र में

कुल एकादशी 202626 (24 सामान्य + 2 अधिक मास की विशेष एकादशी)
अधिक मास17 मई – 15 जून 2026 (अधिक ज्येष्ठ मास)
पहली एकादशी14 जनवरी 2026 — षट्तिला एकादशी
अंतिम एकादशी20 दिसंबर 2026 — मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)
सबसे कठिन व्रतनिर्जला एकादशी (25 जून) — बिना जल के उपवास
सबसे महत्वपूर्णदेवशयनी, देवउठनी, निर्जला, मोक्षदा एकादशी
देवताभगवान विष्णु (श्री हरि)
पारणअगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद

Ekadashi 2026 List – सम्पूर्ण 26 एकादशी तारीख और नाम

नीचे दी गई सूची उत्तर भारतीय पंचांग (IST, नई दिल्ली) पर आधारित है। स्थान के अनुसार तारीख में 1 दिन का अंतर हो सकता है।

क्र.एकादशी नामतारीख व दिनपक्ष / मास
1षट्तिला एकादशी14 जनवरी 2026, बुधवारपौष कृष्ण एकादशी
2जया एकादशी29 जनवरी 2026, बृहस्पतिवारमाघ शुक्ल एकादशी
3विजया एकादशी13 फरवरी 2026, शुक्रवारमाघ कृष्ण एकादशी
4आमलकी एकादशी27 फरवरी 2026, शुक्रवारफाल्गुन शुक्ल एकादशी
5पापमोचनी एकादशी15 मार्च 2026, रविवारचैत्र कृष्ण एकादशी
6कामदा एकादशी29 मार्च 2026, रविवारचैत्र शुक्ल एकादशी
7वरूथिनी एकादशी13 अप्रैल 2026, सोमवारवैशाख कृष्ण एकादशी
8मोहिनी एकादशी27 अप्रैल 2026, सोमवारवैशाख शुक्ल एकादशी
9अपरा एकादशी13 मई 2026, बुधवारज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
10पद्मिनी एकादशी (अधिक मास)27 मई 2026, बुधवारअधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
11परमा एकादशी (अधिक मास)11 जून 2026, बृहस्पतिवारअधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
12निर्जला एकादशी25 जून 2026, बृहस्पतिवारज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
13योगिनी एकादशी10 जुलाई 2026, शुक्रवारआषाढ़ कृष्ण एकादशी
14देवशयनी एकादशी25 जुलाई 2026, शनिवारआषाढ़ शुक्ल एकादशी
15कामिका एकादशी9 अगस्त 2026, रविवारश्रावण कृष्ण एकादशी
16श्रावण पुत्रदा एकादशी23 अगस्त 2026, रविवारश्रावण शुक्ल एकादशी
17अजा एकादशी7 सितंबर 2026, सोमवारभाद्रपद कृष्ण एकादशी
18परिवर्तिनी / पद्मा एकादशी22 सितंबर 2026, मंगलवारभाद्रपद शुक्ल एकादशी
19इंदिरा एकादशी6 अक्टूबर 2026, मंगलवारआश्विन कृष्ण एकादशी
20पापांकुशा एकादशी22 अक्टूबर 2026, बृहस्पतिवारआश्विन शुक्ल एकादशी
21रमा एकादशी5 नवंबर 2026, बृहस्पतिवारकार्तिक कृष्ण एकादशी
22देवउठनी / प्रबोधिनी एकादशी20 नवंबर 2026, शुक्रवारकार्तिक शुक्ल एकादशी
23उत्पन्ना एकादशी4 दिसंबर 2026, शुक्रवारमार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
24मोक्षदा एकादशी20 दिसंबर 2026, रविवारमार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

* पारण (व्रत खोलना): प्रत्येक एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करें।

हर एकादशी का महत्व – संक्षिप्त विवरण

हर एकादशी का अपना अलग महत्व और कथा है। यहाँ सभी 26 एकादशियों का संक्षिप्त महत्व दिया गया है:

एकादशीमहत्व / विशेषता
षट्तिला एकादशीदान-पुण्य का विशेष दिन, तिल दान से पापों का नाश
जया एकादशीभूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति, स्वर्गलोक प्राप्ति
विजया एकादशीशत्रुओं पर विजय, युद्ध या संघर्ष में सफलता
आमलकी एकादशीआंवले की पूजा — आयु, स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति
पापमोचनी एकादशीपापों से मुक्ति, नकारात्मक ऊर्जा का नाश
कामदा एकादशीमनोकामना पूर्ण, शाप-मोचन
वरूथिनी एकादशीदस अश्वमेध यज्ञ का फल, सौभाग्य वृद्धि
मोहिनी एकादशीमोह-माया से मुक्ति, राम जी की पूजा
अपरा एकादशीअपार पुण्य, ब्रह्महत्या जैसे पापों का नाश
पद्मिनी एकादशी (अधिक मास)अधिक मास की विशेष एकादशी — हजार गुना फल
परमा एकादशी (अधिक मास)अधिक मास की दूसरी विशेष एकादशी — विष्णु जी को अत्यंत प्रिय
निर्जला एकादशीसभी 24 एकादशियों का फल — बिना जल के उपवास
योगिनी एकादशीरोग-शोक से मुक्ति, ८८ हजार ब्राह्मण भोज का पुण्य
देवशयनी एकादशीचातुर्मास प्रारंभ — भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं
कामिका एकादशीतुलसी पूजा से विशेष फल, श्रावण का पवित्र व्रत
श्रावण पुत्रदा एकादशीसंतान प्राप्ति, पुत्र की लंबी उम्र के लिए
अजा एकादशीअजन्मे दोषों का नाश, वाजपेय यज्ञ का फल
परिवर्तिनी / पद्मा एकादशीविष्णु जी करवट बदलते हैं — करोड़ों गोदान का फल
इंदिरा एकादशीपितृ दोष से मुक्ति, पितरों की आत्मा की शांति
पापांकुशा एकादशीपापों का नाश, नरक से मुक्ति
रमा एकादशीधन-धान्य, सौभाग्य और वैभव
देवउठनी / प्रबोधिनी एकादशीविष्णु जी जागते हैं — चातुर्मास समाप्त, विवाह मुहूर्त शुरू
उत्पन्ना एकादशीएकादशी व्रत की उत्पत्ति का दिन — महाफलदायी
मोक्षदा एकादशीगीता जयंती — मोक्ष प्राप्ति, वैकुंठ एकादशी

2026 की 4 सबसे महत्वपूर्ण एकादशियाँ

निर्जला एकादशी – 25 जून 2026 (सर्वश्रेष्ठ एकादशी)

निर्जला एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहते हैं। इस दिन बिना अन्न और बिना जल के उपवास किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह एकादशी अकेले साल की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य देती है। जेठ के महीने में यह व्रत करना अत्यंत कठिन है, लेकिन उतना ही फलदायी भी।

देवशयनी एकादशी – 25 जुलाई 2026 (चातुर्मास प्रारंभ)

इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दिन से चातुर्मास शुरू होता है — जिसमें विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। चातुर्मास में पूजा-पाठ, भजन और साधना का विशेष महत्व है।

देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर 2026 (चातुर्मास समाप्ति)

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की नींद से जागते हैं। इस दिन से विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त फिर शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है।

मोक्षदा एकादशी – 20 दिसंबर 2026 (गीता जयंती)

मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था — इसलिए इसे गीता जयंती भी कहते हैं। इस दिन पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और भक्त को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

अधिक मास 2026 की दो विशेष एकादशियाँ

2026 में अधिक ज्येष्ठ मास (17 मई – 15 जून) के दौरान दो अतिरिक्त एकादशियाँ आती हैं। शास्त्रों में इन्हें साधारण एकादशियों से हजार गुना अधिक फलदायी बताया गया है।

पद्मिनी एकादशी27 मई 2026 (बुधवार) — अधिक मास शुक्ल एकादशी — सम्पत्ति दोष और दरिद्रता से मुक्ति
परमा एकादशी11 जून 2026 (बृहस्पतिवार) — अधिक मास कृष्ण एकादशी — विष्णु जी को अत्यंत प्रिय, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति

इन दोनों दिनों भगवान विष्णु की विशेष पूजा, भजन, सत्यनारायण कथा और दान करने से अत्यंत शुभ फल मिलता है।

Ekadashi Vrat Vidhi – व्रत की सही विधि

दशमी (एक दिन पहले)

  • एकादशी से एक दिन पहले सात्त्विक भोजन करें।
  • रात को हल्का भोजन करें — प्याज, लहसुन, माँस वर्जित।
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं।

एकादशी के दिन

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की मूर्ति/फोटो के सामने दीप, फूल, तुलसी दल, पान, अक्षत और फल अर्पित करें।
  3. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
  4. विष्णु सहस्रनाम, भागवत कथा या एकादशी माहात्म्य का पाठ करें।
  5. दिन-रात जागरण करें — भजन-कीर्तन में समय बिताएं।
  6. व्रत में केवल फलाहार, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा ग्रहण करें।
  7. चावल, गेहूं, दाल और नमक (सेंधा नमक स्वीकृत है) वर्जित है।

द्वादशी पर पारण

  • अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद पारण करें।
  • पारण से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
  • पारण का समय: पंचांग में दिए द्वादशी के अनुसार — इसे अनदेखा न करें।

एकादशी व्रत की विस्तृत कथा पढ़ें: एकादशी व्रत कथा संग्रह

Ekadashi Vrat में क्या खाएं / क्या न खाएं

क्या खाएं (अनुमति है)क्या न खाएं (वर्जित है)
फल — केला, सेब, अनार, आम, अंगूरचावल, गेहूं, जौ, मक्का
दूध, दही, पनीर, मट्ठासभी प्रकार की दाल
मखाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटाप्याज, लहसुन, हरी सब्जियां (कुछ परंपराओं में)
साबूदाना खिचड़ी या खीरमाँस, मछली, अंडा
मूंगफली, काजू, बादाम, किशमिशसाधारण नमक (सेंधा नमक चलता है)
शहद, चाय (बिना दूध)शराब, तम्बाकू
आलू, शकरकंद (सात्त्विक रूप से)बाजारू जंक फूड, तले-भुने व्यंजन

Ekadashi 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

2026 में कितनी एकादशियाँ हैं?

2026 में कुल 26 एकादशियाँ हैं। सामान्य वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, लेकिन 2026 में अधिक मास (17 मई – 15 जून) पड़ने के कारण 2 अतिरिक्त एकादशियाँ — पद्मिनी (27 मई) और परमा (11 जून) — भी आती हैं।

एकादशी का व्रत किसके लिए है?

एकादशी व्रत भगवान विष्णु के भक्तों के लिए है। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध — सभी इस व्रत को कर सकते हैं। जो पूर्ण उपवास नहीं कर सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। मुख्य बात श्रद्धा और भक्ति है।

एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल में महर्षि जी का वास होता है — इसलिए इसे खाना वर्जित माना जाता है। इस दिन अन्न (अनाज) का सेवन पुण्य को नष्ट करता है। इसीलिए व्रत में फल, दूध और कुट्टू का आटा खाया जाता है।

2026 में सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन सी है?

2026 की चार सबसे महत्वपूर्ण एकादशियाँ हैं: (1) निर्जला एकादशी (25 जून) — सभी एकादशियों का फल देने वाली, (2) देवशयनी एकादशी (25 जुलाई) — चातुर्मास शुरू, (3) देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) — चातुर्मास समाप्त, और (4) मोक्षदा एकादशी (20 दिसंबर) — गीता जयंती।

एकादशी पारण का क्या अर्थ है?

पारण का अर्थ है एकादशी व्रत का समापन — यानी उपवास तोड़ना। यह अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद करना चाहिए। पारण का समय पंचांग में दिया होता है — समय से बाहर पारण करना पुण्य को नष्ट करता है।

क्या एकादशी का व्रत बीमारी में भी करना चाहिए?

बीमारी या कमजोरी की स्थिति में पूर्ण उपवास जरूरी नहीं है। ऐसे में फलाहार, दूध या हल्का सात्त्विक भोजन करते हुए मन से विष्णु जी का स्मरण करना भी व्रत के समान फल देता है। भगवान भाव के भूखे हैं, कठोरता के नहीं।

क्या अधिक मास की एकादशियाँ ज्यादा फलदायी हैं?

हाँ। शास्त्रों के अनुसार अधिक मास की एकादशियाँ — पद्मिनी (27 मई) और परमा (11 जून) — सामान्य एकादशियों से हजार गुना अधिक फलदायी हैं। यह अधिक मास भगवान विष्णु का महीना है, इसलिए इस माह में किए गए व्रत और पूजा का विशेष पुण्य मिलता है।

Sharandham पर और भी पढ़ें

एकादशी से जुड़ी सामग्री

व्रत कथा: एकादशी व्रत कथा – सम्पूर्ण संग्रह

आरती: भगवान विष्णु की आरती

चालीसा: विष्णु चालीसा हिंदी में

पूजा विधि: सत्यनारायण पूजा विधि

अन्य महत्वपूर्ण व्रत और पर्व

पूर्णिमा 2026: Purnima 2026 Dates – सभी 13 पूर्णिमा तारीख

अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates – सभी 13 अमावस्या तारीख

त्योहार कैलेंडर: Hindu Festival Calendar 2026 – सम्पूर्ण त्योहार सूची

निष्कर्ष – एकादशी व्रत: जीवन का सबसे सरल और शक्तिशाली व्रत

एकादशी व्रत के लिए न कोई बड़ा आयोजन चाहिए, न ज्यादा पैसा — बस चाहिए श्रद्धा, संकल्प और भगवान विष्णु पर विश्वास। साल में 26 एकादशियाँ मतलब 26 बार आपके जीवन को बेहतर बनाने का अवसर।

इस Ekadashi 2026 List को bookmark करें और हर एकादशी पर अपने भगवान की आराधना करें। जय श्री हरि!

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — प्रत्येक एकादशी पर जाप करें, श्री हरि की कृपा पाएं।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | विष्णु आरती

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Amavasya May 2026 – शनि अमावस्या: तारीख, पूजा विधि, महत्व और शनि दोष निवारण

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Shani Amavasya May 2026

‘शनि अमावस्या’ — यह नाम सुनते ही बहुत लोगों के मन में एक विशेष भावना जागती है। जब कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शनिवार को पड़ती है, तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं। यह दिन शनि देव की कृपा पाने, शनि दोष निवारण और पितृ तर्पण के लिए वर्ष की सबसे शक्तिशाली तिथियों में से एक माना जाता है।

2026 में शनि अमावस्या 16 मई, शनिवार को है — और यह अधिक मास से ठीक एक दिन पहले है। इसलिए इस बार का यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

Amavasya May 2026 – तारीख और विवरण

तारीख16 मई 2026, शनिवार
तिथिज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या (शनि अमावस्या)
अमावस्या प्रारंभ16 मई 2026, सुबह 5:11 बजे
अमावस्या समाप्ति17 मई 2026, रात 1:30 बजे
कुतुप मुहूर्तदोपहर 11:36 – 12:24 बजे — पितृ तर्पण के लिए सर्वोत्तम
विशेष संयोगअधिक मास प्रारंभ 17 मई से — यह आखिरी नियमित अमावस्या
शनि देवशनि अमावस्या — शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या निवारण
पितृ कार्यज्येष्ठ अमावस्या — पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए उत्तम

Shani Amavasya का महत्व – क्यों है यह इतनी खास?

शनि देव का संबंध

शनि देव न्याय के देवता हैं — वे कर्म के अनुसार फल देते हैं। जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि महादशा से प्रभावित हैं, उनके लिए शनि अमावस्या एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन की गई पूजा और दान शनि देव को प्रसन्न करते हैं और उनके प्रकोप को शांत करते हैं।

पितरों का संबंध

प्रत्येक अमावस्या पितरों को समर्पित होती है। शनि अमावस्या पर शनि देव और पितर — दोनों की एक साथ पूजा होती है। पितृ दोष से मुक्ति और पितरों की शांति के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

विशेष संयोग

यह 16 मई की अमावस्या और भी खास है क्योंकि अधिक मास 17 मई से शुरू होगा। यानी यह अमावस्या अधिक मास से ठीक पहले की है — और पंचांग के अनुसार इस समय किए गए शनि पूजन और पितृ तर्पण का फल कई गुना होता है।

Shani Amavasya Puja Vidhi – पूजा विधि

प्रातःकाल

  1. ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. शनि मंदिर जाएं या घर पर शनि यंत्र या शनि देव की तस्वीर के सामने दीप जलाएं।
  3. काला तिल, सरसों का तेल, काली उड़द दाल, और लोहे का दान करें।
  4. ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ या ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

कुतुप मुहूर्त में पितृ तर्पण

  1. दोपहर 11:36 – 12:24 बजे के बीच — दक्षिण दिशा में मुख करके।
  2. काले तिल, कुश घास और जल से पितरों को तर्पण दें।
  3. पितरों का नाम लेकर जल अर्पित करें।
  4. ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।

पीपल पूजन

  1. पीपल के पेड़ में सरसों का तेल और जल चढ़ाएं।
  2. 107 बार पीपल की परिक्रमा करें (शनि अमावस्या पर यह संख्या शुभ)।
  3. पीपल की जड़ में दीपक जलाएं।

शनि दोष निवारण के उपाय – Shani Amavasya पर

  • शनि मंदिर में सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करें।
  • काले तिल, काली उड़द दाल और काले कपड़े का दान करें।
  • किसी विकलांग, वृद्ध या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें — शनि देव इससे प्रसन्न होते हैं।
  • हनुमान जी की पूजा करें — हनुमान जी शनि के प्रकोप से बचाते हैं।
  • ‘शनि चालीसा’ का पाठ करें।
  • दोपहर में काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।
  • नीलम या नीली रंग की चीजें दान करें।

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क्या खाएं / क्या न खाएं – Amavasya Vrat

क्या करेंक्या न करें
फल — केला, सेब, अंगूरमाँस, मछली, अंडा
दूध, दही, मखानाप्याज, लहसुन
कुट्टू या साबूदाना (व्रत में)चावल, गेहूं (सख्त व्रत में)
तिल के लड्डू, गुड़तामसिक भोजन, नशा
काले तिल का दान और सेवननकारात्मक विचार

Amavasya May 2026 – FAQs

मई 2026 में अमावस्या कब है?

मई 2026 में अमावस्या 16 मई, शनिवार को है। यह ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या है जो शनिवार को पड़ने के कारण ‘शनि अमावस्या’ बन जाती है।

शनि अमावस्या 2026 क्यों खास है?

2026 की शनि अमावस्या (16 मई) इसलिए खास है क्योंकि यह अधिक मास शुरू होने से ठीक एक दिन पहले है। इस अवसर पर शनि दोष निवारण, पितृ तर्पण और विष्णु पूजा का फल कई गुना होता है।

शनि अमावस्या पर क्या दान करें?

शनि अमावस्या पर काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द दाल, लोहे का सामान, काले कपड़े और अन्न का दान करना शुभ है। किसी विकलांग या वृद्ध की सेवा करना भी शनि देव को प्रिय है।

पितृ तर्पण के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

16 मई को कुतुप मुहूर्त — दोपहर 11:36 बजे से 12:24 बजे तक — पितृ तर्पण के लिए सर्वोत्तम समय है। इस दौरान दक्षिण दिशा में मुख करके काले तिल और कुश से तर्पण करें।

क्या अधिक मास में अमावस्या अलग होती है?

हाँ। अधिक मास (17 मई से 15 जून 2026) की अमावस्या 14 जून को होगी — इसे ‘अधिक ज्येष्ठ अमावस्या’ कहते हैं और यह भगवान विष्णु की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम है।

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निष्कर्ष

शनि अमावस्या वह पावन दिन है जब श्रद्धा और कर्म — दोनों का संगम होता है। शनि देव न्यायकारी हैं — वे उन्हें दंड नहीं देते जो सच्चे मन से उनकी भक्ति करते हैं। इस दिन की पूजा, दान और पितृ तर्पण से जीवन में शांति, सुरक्षा और समृद्धि आती है।

ॐ शं शनैश्चराय नमः — शनि अमावस्या पर शनि देव की आराधना करें, उनकी कृपा पाएं।

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