
शनि देव – न्याय के देवता, कर्म के विधाता। वे भयावह नहीं, न्यायकारी हैं। जो अच्छे कर्म करे उसे पुरस्कार, बुरे कर्म करे उसे दंड –...

गणेश चतुर्थी – भगवान गणेश का जन्मोत्सव। 10 दिन का यह महोत्सव घर में गणपति स्थापना से शुरू होकर विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) पर समाप्त होता है।...
माँ चामुण्डा – दुर्गा जी का वह उग्र रूप जो चण्ड और मुण्ड नामक असुरों का वध करने के बाद ‘चामुण्डा’ कहलाया। वे नवदुर्गा में से...

भगवान हनुमान – राम भक्तों में श्रेष्ठ, शक्ति और भक्ति के प्रतीक। वे अमर हैं और कलियुग में भी पृथ्वी पर विचरण करते हैं। जहाँ राम-कथा...

भगवान विष्णु – त्रिदेवों में पालनकर्ता। जब-जब धर्म की हानि हुई, उन्होंने अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा की। मत्स्य से लेकर कल्कि तक दस अवतार –...

भगवान शिव – त्रिदेवों में सबसे सरल। ‘बेलपत्र जल’ मात्र से प्रसन्न होने वाले भोलेनाथ की पूजा विधि सरल है पर नियमों का पालन जरूरी है।...

भगवान गणेश – प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता। हर शुभ कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। उनका हाथी का सिर और...

माँ बगलामुखी – दस महाविद्याओं में से एक, शत्रु-स्तंभन और वाक्-सिद्धि की देवी। पीत (पीले) रंग से इनकी पूजा होती है। Baglamukhi Chalisa उन लोगों के...

तुलसी विवाह – देवउठनी एकादशी पर माँ तुलसी और शालिग्राम (विष्णु स्वरूप) का दिव्य विवाह। इस दिन से विवाह के मुहूर्त शुरू होते हैं। एक नज़र...

भगवान शिव – त्रिदेवों में संहारक, परंतु भक्तों पर सर्वाधिक दयालु। ‘भोलेनाथ’ – जो सच्चे मन से पुकारे, उसकी इच्छा पूरी करते हैं। शिव पुराण में...