Vrat & Katha
Amla Navami Katha in Hindi – आँवला नवमी व्रत कथा: सम्पूर्ण पाठ और महत्व
आँवला नवमी – कार्तिक शुक्ल नवमी को मनाया जाने वाला एक अनूठा पर्व जिसमें आँवले के वृक्ष की पूजा होती है। आँवले को विष्णु जी का प्रिय वृक्ष माना जाता है। इस दिन आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने और परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य मिलता है।
Amla Navami Katha in Hindi – भगवान विष्णु और आँवले का पवित्र संबंध बताने वाली यह कथा स्वास्थ्य और भक्ति दोनों का संदेश देती है।
Amla Navami Katha in Hindi – एक नज़र में
| व्रत | आँवला नवमी (अक्षय नवमी) |
| तिथि | कार्तिक शुक्ल नवमी |
| विशेष वृक्ष | आँवला – विष्णु जी का प्रिय वृक्ष |
| पूजन | आँवले के पेड़ की परिक्रमा और पूजन |
| भोजन | आँवले के पेड़ के नीचे परिवार के साथ |
| फल | अक्षय पुण्य, दीर्घायु, स्वास्थ्य |
Amla Navami Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा
आँवला नवमी कथा – भगवान विष्णु और आँवले का वरदान
एक बार भगवान विष्णु ने सृष्टि में भ्रमण किया। उन्होंने देखा कि पृथ्वी पर मनुष्य रोग और कष्टों से पीड़ित हैं। उन्होंने ब्रह्मा जी से पूछा – ‘ऐसा कौन सा वृक्ष है जो मनुष्य के शरीर और आत्मा दोनों को स्वस्थ रखे?’
ब्रह्मा जी ने कहा – ‘आँवले का वृक्ष। इसमें मेरी, विष्णु की और शिव की शक्तियाँ निहित हैं। इसका फल अमृत के समान है।’ तब से भगवान विष्णु को आँवला अत्यंत प्रिय हो गया।
कार्तिक मास में जब भगवान योगनिद्रा से जागते हैं (देवउठनी एकादशी से पहले), तो आँवले के पेड़ में उनका वास माना जाता है। इसीलिए कार्तिक शुक्ल नवमी को आँवले की पूजा होती है।
जो स्त्री-पुरुष इस दिन आँवले के पेड़ की पूजा करते हैं, परिक्रमा लगाते हैं और उसके नीचे भोजन करते हैं – उन्हें अक्षय पुण्य मिलता है और जीवन में स्वास्थ्य बना रहता है।
Amla Navami Katha in Hindi – पूजन / पाठ विधि
- कार्तिक शुक्ल नवमी को प्रातःकाल स्नान करें।
- आँवले के वृक्ष को जल, रोली-अक्षत, फूल और धूप अर्पित करें।
- आँवले के वृक्ष की 108 परिक्रमा करें।
- आँवला नवमी कथा सुनें।
- परिवार के साथ आँवले के पेड़ के नीचे भोजन करें।
- आँवले का दान करें।
Amla Navami Katha in Hindi के लाभ
- अक्षय पुण्य की प्राप्ति
- दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य
- विष्णु जी की कृपा
- परिवार में सुख-समृद्धि
- आँवले के सेवन से शरीर शुद्धि
Amla Navami Katha in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
आँवला नवमी 2026 कब है?
कार्तिक शुक्ल नवमी – नवंबर 2026।
आँवले के पेड़ की पूजा क्यों?
आँवला भगवान विष्णु का प्रिय वृक्ष है। कार्तिक में इसमें विष्णु जी का वास माना जाता है।
‘अक्षय नवमी’ क्यों कहते हैं?
इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल कभी नष्ट नहीं होता – इसीलिए ‘अक्षय’ (अविनाशी) नवमी।
आँवले के पेड़ के नीचे भोजन क्यों?
इससे देवताओं के साथ भोजन करने का पुण्य मिलता है – ऐसी मान्यता है।
Sharandham पर और भी पढ़ें
विष्णु जी की आरती: विष्णु जी की आरती
तुलसी माता आरती: तुलसी माता आरती
हिंदू त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates
निष्कर्ष
Amla Navami Katha in Hindi हमारी सनातन परंपरा का अनमोल हिस्सा है। यह कथा न केवल ईश्वर की महिमा बताती है बल्कि जीवन में धर्म, सत्य और भक्ति का मार्ग भी दिखाती है। इसे श्रद्धापूर्वक सुनें और अपने परिवार को भी सुनाएं।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – Amla Navami Katha श्रद्धा से सुनें, अक्षय पुण्य और उत्तम स्वास्थ्य पाएं।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
Vrat & Katha
Shiv Puran Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा, अर्थ और महत्व

शिव पुराण – भगवान शिव की महिमा का सबसे विस्तृत ग्रंथ। इसमें 7 संहिताएं और 24,000 श्लोक हैं। शिव पुराण में जोतिर्लिंगों का माहात्म्य, शिव-पार्वती विवाह और शिव भक्तों की कथाएं वर्णित हैं।
Shiv Puran Katha in Hindi – भगवान शिव के प्रमुख प्रसंगों का सार – सती, पार्वती, गणेश जन्म और 12 जोतिर्लिंगों की महिमा।
Shiv Puran Katha in Hindi – एक नज़र में
| कथा | Shiv Puran Katha |
| देवता | भगवान शिव |
| पाठ का समय | 45–60 मिनट |
| विशेष अवसर | संबंधित व्रत-त्योहार, मंगल अवसर |
| फल | जोतिर्लिंग दर्शन का पुण्य |
Shiv Puran Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा
Shiv Puran Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा
सती कथा: दक्ष प्रजापति की पुत्री सती ने शिव जी से विवाह किया था। एक बार दक्ष ने यज्ञ आयोजित किया – शिव को आमंत्रण नहीं दिया। सती वहाँ गईं – पिता ने शिव का अपमान किया। सती ने यज्ञ-अग्नि में प्राण त्याग दिए। शिव जी ने सती का शव कंधे पर उठाकर ताण्डव किया। विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से सती के 51 टुकड़े किए – ये सभी स्थान 51 शक्तिपीठ बने।
सती ने अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और फिर शिव जी को पाया।
12 जोतिर्लिंगों की महिमा: सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर – इन 12 स्थानों में शिव जी का ज्योतिस्वरूप विराजमान है।
Shiv Puran Katha in Hindi – पूजन / पाठ विधि
- शिव पुराण का पाठ – 7 दिन का अनुष्ठान।
- प्रतिदिन शिव अभिषेक।
- बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप।
- श्रावण मास में विशेष पाठ।
Shiv Puran Katha in Hindi के लाभ
- जोतिर्लिंग दर्शन का पुण्य
- शिव कृपा
- पापनाश
- मोक्ष
- रोग मुक्ति और मनोकामना पूर्ति
Shiv Puran Katha in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Shiv Puran Katha कब सुनें?
संबंधित व्रत-पर्व पर। मंगल अवसरों पर। और प्रतिदिन भी।
कथा सुनने के लिए क्या तैयारी करें?
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, दीप जलाएं, भगवान को फूल-फल अर्पित करें।
क्या बच्चे भी कथा सुन सकते हैं?
हाँ – बचपन से कथाएं सुनने से संस्कारों का विकास होता है।
कथा के बाद प्रसाद?
हाँ – फल, मिठाई या पंजीरी वितरित करें।
Sharandham पर और भी पढ़ें
शिव चालीसा: शिव चालीसा
सोमवार व्रत आरती: सोमवार व्रत आरती
शिवरात्रि व्रत कथा: शिवरात्रि व्रत कथा
प्रदोष व्रत कथा: प्रदोष व्रत कथा
हिंदू त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates
निष्कर्ष
Shiv Puran Katha in Hindi हमारी सनातन परंपरा का अनमोल हिस्सा है। यह कथा न केवल ईश्वर की महिमा बताती है बल्कि जीवन में धर्म, सत्य और भक्ति का मार्ग भी दिखाती है। इसे श्रद्धापूर्वक सुनें और अपने परिवार को भी सुनाएं।
हर हर महादेव! – Shiv Puran Katha श्रद्धा से सुनें, भगवान शिव की कृपा से जीवन में शांति और मोक्ष पाएं।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
Vrat & Katha
Garud Puran Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा, अर्थ और महत्व

गरुड़ पुराण – मृत्यु के बाद की यात्रा का विस्तृत वर्णन। मृत्यु के समय और उसके बाद 13 दिन तक इसका पाठ किया जाता है। इसमें आत्मा की यात्रा, नरक-स्वर्ग के वर्णन और मोक्ष का मार्ग बताया गया है।
Garud Puran Katha in Hindi – गरुड़ जी और भगवान विष्णु के बीच जीवन-मृत्यु के रहस्यों का संवाद।
Garud Puran Katha in Hindi – एक नज़र में
| कथा | Garud Puran Katha |
| देवता | भगवान विष्णु और गरुड़ |
| पाठ का समय | 45–60 मिनट |
| विशेष अवसर | संबंधित व्रत-त्योहार, मंगल अवसर |
| फल | मृत आत्मा को शांति |
Garud Puran Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा
गरुड़ (विष्णु का वाहन) ने भगवान विष्णु से पूछा – ‘प्रभु! मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? यमलोक का मार्ग कैसा है? पाप-पुण्य का हिसाब कैसे होता है?’
भगवान विष्णु ने बताया – मृत्यु के बाद यमदूत आत्मा को यमलोक ले जाते हैं। वहाँ चित्रगुप्त के पास पूरे जीवन का हिसाब होता है। अच्छे कर्मों के अनुसार स्वर्ग, बुरे कर्मों के अनुसार नरक। 84 लाख योनियों में भ्रमण। मोक्ष केवल भगवान की भक्ति, सत्कर्म और ज्ञान से मिलता है।
इस पुराण में यह भी बताया गया है कि जीते जी क्या-क्या दान करें ताकि मृत्यु के बाद सुगति हो – अन्नदान, वस्त्रदान, गोदान विशेष फलदायी हैं।
Garud Puran Katha in Hindi – पूजन / पाठ विधि
- मृत्यु के 13 दिन तक गरुड़ पुराण का पाठ।
- श्राद्ध और पितृ तर्पण।
- ब्राह्मण को भोजन और दान।
- तिल, जल और कुश से तर्पण।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप।
Garud Puran Katha in Hindi के लाभ
- मृत आत्मा को शांति
- परिवार में पितृ दोष से मुक्ति
- मोक्ष का मार्ग
- जीते जी अच्छे कर्म करने की प्रेरणा
- पितरों की आत्मशांति
Garud Puran Katha in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Garud Puran Katha कब सुनें?
संबंधित व्रत-पर्व पर। मंगल अवसरों पर। और प्रतिदिन भी।
कथा सुनने के लिए क्या तैयारी करें?
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, दीप जलाएं, भगवान को फूल-फल अर्पित करें।
क्या बच्चे भी कथा सुन सकते हैं?
हाँ – बचपन से कथाएं सुनने से संस्कारों का विकास होता है।
कथा के बाद प्रसाद?
हाँ – फल, मिठाई या पंजीरी वितरित करें।
Sharandham पर और भी पढ़ें
विष्णु जी की आरती: विष्णु जी की आरती
अमावस्या 2026: अमावस्या 2026
पूर्णिमा 2026: पूर्णिमा 2026
एकादशी 2026: एकादशी 2026
हिंदू त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates
निष्कर्ष
Garud Puran Katha in Hindi हमारी सनातन परंपरा का अनमोल हिस्सा है। यह कथा न केवल ईश्वर की महिमा बताती है बल्कि जीवन में धर्म, सत्य और भक्ति का मार्ग भी दिखाती है। इसे श्रद्धापूर्वक सुनें और अपने परिवार को भी सुनाएं।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – Garud Puran Katha श्रद्धा से सुनें, जीवन में सत्कर्म करें और मोक्ष का मार्ग पाएं।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
Vrat & Katha
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा, अर्थ और महत्व

भगवान श्री कृष्ण और विष्णु – भूमिका
श्रीमद्भागवत – 18 महापुराणों का सार। महर्षि वेदव्यास ने इसे लिखा और शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को सुनाया। 12 स्कंध और 18,000 श्लोकों में जीवन का सम्पूर्ण ज्ञान है।
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi – सात दिन (सप्ताह) में श्रीमद्भागवत सुनने से मोक्ष का मार्ग खुलता है।
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi – एक नज़र में
| कथा | Shrimad Bhagwat Katha |
| देवता | भगवान श्री कृष्ण और विष्णु |
| पाठ का समय | 45–60 मिनट |
| विशेष अवसर | संबंधित व्रत-त्योहार, मंगल अवसर |
| फल | मोक्ष का मार्ग |
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi – सम्पूर्ण कथा
राजा परीक्षित को तक्षक नाग द्वारा 7 दिन में मृत्यु का श्राप मिला। उन्होंने संसार त्यागकर गंगा तट पर बैठ गए। वहाँ शुकदेव मुनि आए। राजा ने पूछा – ‘मृत्यु के इन अंतिम क्षणों में मुझे क्या करना चाहिए?’ शुकदेव मुनि ने श्रीमद्भागवत के 12 स्कंध सुनाए – 7 दिन में।
भागवत में ब्रह्माण्ड की रचना, भक्ति का मार्ग, भगवान के 24 अवतार, गोपियों की भक्ति, राजा परीक्षित और राजाओं की कथाएं, और अंत में भक्ति मार्ग – सब वर्णित है। परीक्षित ने 7 दिन में मोक्ष पाया।
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi – पूजन / पाठ विधि
- 7 दिन का भागवत सप्ताह अनुष्ठान।
- प्रतिदिन कम से कम एक स्कंध सुनें।
- कथा वाचक (पंडित) द्वारा कथा श्रवण।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ जाप।
- श्रोताओं को भोजन और दक्षिणा।
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi के लाभ
- मोक्ष का मार्ग
- जीवन में भक्ति का विकास
- पापों का नाश
- परिवार में शांति
- 7 दिन की कथा = 7 जन्मों का पुण्य
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Shrimad Bhagwat Katha कब सुनें?
संबंधित व्रत-पर्व पर। मंगल अवसरों पर। और प्रतिदिन भी।
कथा सुनने के लिए क्या तैयारी करें?
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, दीप जलाएं, भगवान को फूल-फल अर्पित करें।
क्या बच्चे भी कथा सुन सकते हैं?
हाँ – बचपन से कथाएं सुनने से संस्कारों का विकास होता है।
कथा के बाद प्रसाद?
हाँ – फल, मिठाई या पंजीरी वितरित करें।
Sharandham पर और भी पढ़ें
विष्णु जी की आरती: विष्णु जी की आरती
सत्यनारायण कथा: सत्यनारायण कथा
एकादशी 2026: एकादशी 2026
पूर्णिमा 2026: पूर्णिमा 2026
हिंदू त्योहार: Hindu Festival Calendar 2026
एकादशी 2026: Ekadashi 2026 List
अमावस्या 2026: Amavasya 2026 Dates
निष्कर्ष
Shrimad Bhagwat Katha in Hindi हमारी सनातन परंपरा का अनमोल हिस्सा है। यह कथा न केवल ईश्वर की महिमा बताती है बल्कि जीवन में धर्म, सत्य और भक्ति का मार्ग भी दिखाती है। इसे श्रद्धापूर्वक सुनें और अपने परिवार को भी सुनाएं।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – Shrimad Bhagwat Katha श्रद्धा से सुनें, भगवान की भक्ति से मोक्ष का मार्ग मिले।
Sharandham पर देखें: सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह | आरती संग्रह | चालीसा संग्रह
-
Temples7 months agoकालकाजी मंदिर (Kalkaji Mandir) – इतिहास, दर्शन समय, महत्व और पूरी जानकारी
-
Temples7 months agoहनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस (Hanuman Mandir, Connaught Place) – इतिहास, महत्व और दर्शनीय जानकारी
-
Temples7 months agoलखनऊ के टॉप 10 प्रसिद्ध हिंदू मंदिर | Top 10 Best Hindu Temples in Lucknow to Visit (2026)
-
Aarti7 months agoSai Baba Aarti Lyrics in Hindi: आरती, महत्व, और पूजा विधि
-
Temples7 months agoफरीदाबाद के टॉप मंदिरों की सूची | आरती समय, दर्शन व पता | Top Mandir List of Faridabad
-
Chalisa7 months agoShree Hanuman Chalisa – श्री हनुमान चालीसा: Full Lyrics, Meaning & Benefits
-
Aarti7 months agoहनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti in Hindi) – Lyrics, Meaning & Benefits
-
Temples7 months agoनोएडा के Top 10 प्रसिद्ध मंदिर | Noida Mandir List with Timings, Aarti & Location

You must be logged in to post a comment Login