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Top 10 Famous Temples in Tripura त्रिपुरा के 10 प्रसिद्ध मंदिर – Darshan Timing, Aarti Time & Travel Guide
Tripura – City Introduction | त्रिपुरा के बारे में
त्रिपुरा – नाम सुनते ही मन में एक हरी-भरी, शांत और आध्यात्मिक जगह की तस्वीर उभरती है। भारत के उत्तर-पूर्व में बसा यह छोटा सा राज्य तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है और राजधानी है अगरतला। बाहर से देखने में शायद यह राज्य छोटा लगे, लेकिन यहाँ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत किसी भी बड़े राज्य से कम नहीं है।
माणिक्य राजवंश ने यहाँ सदियों तक शासन किया और इस दौरान अनेक भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ। भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक – माँ त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर – यहीं है। इसके अलावा उनाकोटि की रॉक-कट मूर्तियाँ, देवतामुरा का अनोखा शैल-मंदिर और खरची पूजा जैसे उत्सव त्रिपुरा को एक खास तीर्थस्थल बनाते हैं। अधिक जानकारी के लिए: Tripura Tourism Official Website।
यहाँ 19 जनजातियाँ रहती हैं जिनकी अपनी अलग पूजा-परंपराएँ हैं। हिंदू, बौद्ध और जनजातीय आस्थाओं का यह संगम यहाँ की मंदिर परंपरा में भी दिखता है। अगर आप सच में एक ऐसे तीर्थ की तलाश में हैं जहाँ शांति हो, इतिहास हो और माँ की कृपा भी – तो त्रिपुरा ज़रूर आएं। अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा रहता है।
त्रिपुरा के Top 10 मंदिर – एक नज़र में
- 1. Tripura Sundari Temple (Matabari) – उदयपुर
- 2. Jagannath Temple – अगरतला
- 3. Chaturdasha Devata Temple – पुरानी अगरतला
- 4. Bhuvaneswari Temple – उदयपुर
- 5. Unakoti – कैलाशहर
- 6. Kamalasagar Kali Temple – पश्चिम त्रिपुरा
- 7. Maa Bhabatarini Temple – उनाकोटि
- 8. Deotamura Rock Shrine – गोमती
- 9. Lakshmi Narayan Temple – अगरतला
- 10. Kasba Kali Bari – अगरतला
1. Tripura Sundari Temple, Udaipur – त्रिपुरा का सबसे बड़ा शक्तिपीठ
अगर आप त्रिपुरा जा रहे हैं और एक ही मंदिर देख सकते हैं, तो वो होना चाहिए – माँ त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर। उदयपुर में एक कछुए के आकार की छोटी सी पहाड़ी पर बना यह मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि यहाँ माता सती का दायाँ पैर गिरा था, इसीलिए इसे महापीठ कहते हैं।
मंदिर का निर्माण 1501 ई. में महाराजा धन्य माणिक्य ने करवाया था। माँ की मूर्ति काले पत्थर से बनी है और देखते ही मन में एक अजब सी शांति आ जाती है। मंदिर के पास जो कल्याण सागर तालाब है, उसमें सैकड़ों कछुए और मछलियाँ हैं जिन्हें लोग मुरी खिलाते हैं। यह नज़ारा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबको बहुत पसंद आता है। (स्रोत: Wikipedia – Tripura Sundari Temple)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Tripura Sundari Temple Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ त्रिपुरा सुंदरी (ललिता देवी / राज राजेश्वरी) |
| पता | माताबाड़ी, उदयपुर, गोमती जिला, त्रिपुरा – 799120 |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – रात 9:00 PM (दोपहर 12 से 4 बजे बंद – अनुमानित) |
| आरती समय | मंगला आरती: 5:30 AM | शाम आरती: 6:30 PM | शयन आरती: 8:00 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दीपावली |
| अगरतला से दूरी | करीब 55 किमी – NH-8 से (डेढ़ से दो घंटे) |
| नजदीकी रेलवे | उदयपुर रेलवे स्टेशन (5 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (60 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला से NH-8 पर उदयपुर की तरफ चलें – रास्ता बिल्कुल सीधा है। बस, शेयर टैक्सी या अपनी गाड़ी सब चलती है।
रेल मार्ग:अगरतला से उदयपुर के लिए ट्रेन है। स्टेशन से मंदिर सिर्फ 5 किमी है, ऑटो मिल जाते हैं।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट सबसे नजदीक है। कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी से फ्लाइट मिलती है।
2. Jagannath Temple, Agartala – उज्जयंत महल के पास
अगरतला में घूमते वक्त अगर उज्जयंत महल के पास से गुज़रें तो जगन्नाथ मंदिर जरूर देखें। यह मंदिर 19वीं सदी में महाराजा राधा किशोर माणिक्य ने बनवाया था और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को यहाँ पूजा जाता है।
मंदिर की अष्टकोणीय बनावट बड़ी अनोखी है – अरबी और हिंदू स्थापत्य का मेल देखने को मिलता है। रथ यात्रा के दिनों में यहाँ का माहौल देखते ही बनता है – पूरे शहर में उत्सव जैसा नज़ारा रहता है। (स्रोत: Wikipedia – Jagannath Mandir Agartala)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Jagannath Temple Agartala Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा |
| पता | पैलेस कम्पाउंड, कृष्ण नगर, अगरतला, पश्चिम त्रिपुरा – 799001 |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 10:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 7:00 PM |
| बड़े त्योहार | रथ यात्रा, जन्माष्टमी |
| अगरतला से दूरी | शहर के अंदर ही है (रेलवे स्टेशन से 3 किमी) |
| नजदीकी रेलवे | अगरतला रेलवे स्टेशन (3 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (12 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला के अंदर ही है। ऑटो या टैक्सी से आसानी से पहुँच सकते हैं।
रेल मार्ग:अगरतला रेलवे स्टेशन से सिर्फ 3 किमी। रिक्शा या ऑटो से पहुँचें।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 12 किमी। टैक्सी या ऑटो उपलब्ध।
3. Chaturdasha Devata Temple – 14 देवताओं का अनोखा मंदिर
क्या आपने कभी एक ही जगह 14 देवी-देवताओं के दर्शन किए हैं? पुरानी अगरतला में यह संभव है। चतुर्दश देवता मंदिर में दुर्गा, शिव, विष्णु, सरस्वती, गणेश, ब्रह्मा, कार्तिकेय समेत कुल 14 देवताओं की पूजा होती है। 15वीं सदी में महाराजा धन्य माणिक्य ने यह मंदिर बनवाया था।
यहाँ हर साल जुलाई में खरची पूजा होती है जो त्रिपुरा का सबसे बड़ा और सबसे धूमधाम वाला त्योहार है। इस दौरान लाखों लोग आते हैं – ट्राइबल और नॉन-ट्राइबल दोनों। मंदिर की बनावट बंगाली शैली में है जिस पर थोड़ा बौद्ध स्थापत्य का असर भी दिखता है। (स्रोत: Wikipedia – Chaturdasha Devata Temple)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Chaturdasha Devata Temple Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | 14 देवी-देवता (दुर्गा, शिव, विष्णु, गणेश आदि) |
| पता | पुरानी अगरतला, पश्चिम त्रिपुरा – अगरतला से 14 किमी |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 8:00 PM (खरची पूजा पर 24 घंटे खुला) |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:00 AM | शाम आरती: 6:00 PM |
| बड़े त्योहार | खरची पूजा (जुलाई), दुर्गा पूजा |
| अगरतला से दूरी | 14 किमी (बस और टैक्सी मिलती है) |
| नजदीकी रेलवे | अगरतला रेलवे स्टेशन (14 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (24 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला से पुरानी अगरतला के लिए नियमित बसें और टैक्सी मिलती हैं। रास्ता अच्छा है।
रेल मार्ग:अगरतला रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस लें।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से करीब 24 किमी।
4. Bhuvaneswari Temple, Udaipur – गोमती नदी के किनारे
गोमती नदी के किनारे बसा भुवनेश्वरी मंदिर उदयपुर के सबसे शांत और खूबसूरत धार्मिक स्थलों में से एक है। माँ भुवनेश्वरी को समर्पित यह मंदिर बंगाली चारचाला शैली में बना है। खास बात यह है कि रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने नाटकों ‘राजर्षि’ और ‘बिसर्जन’ में इस मंदिर का ज़िक्र किया है।
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर देखने के बाद यहाँ आ सकते हैं – दोनों उदयपुर में ही हैं। काली पूजा के दिनों में यहाँ का माहौल बहुत भक्तिमय हो जाता है। (स्रोत: Wikipedia – Bhuvaneswari Temple Tripura)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Bhuvaneswari Temple Udaipur
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ भुवनेश्वरी |
| पता | गोमती नदी तट, उदयपुर, गोमती जिला, त्रिपुरा |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 5:30 PM |
| बड़े त्योहार | काली पूजा, दुर्गा पूजा |
| अगरतला से दूरी | 55 किमी – NH-8 से |
| नजदीकी रेलवे | उदयपुर रेलवे स्टेशन (2 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (60 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:उदयपुर बस स्टैंड से 2 किमी। ऑटो से पहुँचें।
रेल मार्ग:उदयपुर रेलवे स्टेशन से 2 किमी – पैदल या ऑटो से।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 60 किमी।
5. Unakoti, Kailashahar – पत्थरों में उकेरे 99 लाख देवता
उनाकोटि एक ऐसी जगह है जो एक बार देखी तो उम्र भर याद रहती है। उत्तर त्रिपुरा में कैलाशहर के पास घने जंगलों के बीच पहाड़ी पर 8वीं-9वीं सदी की विशाल रॉक-कट मूर्तियाँ हैं। ‘उनाकोटि’ यानी एक करोड़ से एक कम – मतलब 99 लाख 99 हज़ार 999 देवी-देवताओं की मूर्तियाँ यहाँ उकेरी गई हैं। यह स्थल ASI द्वारा संरक्षित है।
6 मीटर ऊँचा कामाख्या शिव का विग्रह इस पूरी जगह का सबसे प्रभावशाली हिस्सा है। अगर आप ट्रेकिंग और धर्म दोनों पसंद करते हैं तो यह जगह आपके लिए एकदम सही है। चैत्र संक्रांति (अप्रैल) में यहाँ बड़ा मेला लगता है। (स्रोत: Wikipedia – Unakoti)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Unakoti Tripura Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान शिव (ASI संरक्षित रॉक-कट मूर्तियाँ) |
| पता | उनाकोटि, कैलाशहर के पास, उत्तर त्रिपुरा – 799277 |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 5:00 PM |
| आरती समय | चैत्र संक्रांति और महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा |
| बड़े त्योहार | चैत्र संक्रांति मेला (अप्रैल), महाशिवरात्रि |
| अगरतला से दूरी | 178 किमी (बस/कार से करीब 5 घंटे) |
| नजदीकी रेलवे | कुमारघाट रेलवे स्टेशन (8 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (178 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला से कुमारघाट होते हुए उनाकोटि – करीब 178 किमी। सड़क ठीक है पर समय लगता है, सुबह जल्दी निकलें।
रेल मार्ग:कुमारघाट स्टेशन सबसे नजदीक है – वहाँ से 8 किमी पर उनाकोटि है।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 178 किमी।
6. Kamalasagar Kali Temple – सीमा पर माँ काली का धाम
अगरतला से सिर्फ 31 किमी दूर, बांग्लादेश की सीमा के बिल्कुल पास एक पहाड़ी पर माँ काली का यह मंदिर बसा है। 15वीं सदी में महाराजा धन्य माणिक्य ने इसे बनवाया था। नीचे कमलासागर झील का नजारा और ऊपर से बांग्लादेश का बॉर्डर – यहाँ से दृश्य सच में अनोखा होता है।
यहाँ की खासियत यह है कि दोनों तरफ से – भारत और बांग्लादेश – के भक्त माँ के दर्शन को आते हैं। काली पूजा के दिन यहाँ बहुत भीड़ होती है लेकिन माहौल बहुत भक्तिपूर्ण रहता है। (स्रोत: Tripura Tourism – Kamalasagar)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Kamalasagar Kali Temple Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ काली |
| पता | कमलासागर, बिश्रामगंज के पास, पश्चिम त्रिपुरा |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – शाम 6:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 5:30 AM | शाम आरती: 5:30 PM |
| बड़े त्योहार | काली पूजा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि |
| अगरतला से दूरी | 31 किमी (बस या टैक्सी से) |
| नजदीकी रेलवे | अगरतला रेलवे स्टेशन (31 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (40 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला से बस या टैक्सी – 31 किमी का आसान रास्ता। हाफ डे ट्रिप के लिए परफेक्ट है।
रेल मार्ग:अगरतला रेलवे स्टेशन से टैक्सी लें।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 40 किमी।
7. Maa Bhabatarini Temple – जंगल के बीच माँ का घर
उनाकोटि की पहाड़ियों में जहाँ एक तरफ हज़ारों साल पुरानी रॉक-कट मूर्तियाँ हैं, वहीं पास में माँ भबतारिणी का यह छोटा लेकिन बहुत प्रिय मंदिर है। 1981 में स्थापित यह मंदिर माँ दुर्गा के भबतारिणी स्वरूप को समर्पित है।
यहाँ चारों तरफ हरियाली और पहाड़ी झरनों की आवाज़ में दर्शन करने का अनुभव ही अलग है। अप्रैल में चैत्र संक्रांति पर माँ भबतारिणी मेला लगता है जो इस पूरे इलाके का सबसे बड़ा उत्सव है। उनाकोटि आएं तो इस मंदिर में जरूर माथा टेकें। (स्रोत: Tripura Tourism Official)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Maa Bhabatarini Temple Location
| देवता | माँ भबतारिणी (दुर्गा का स्वरूप) |
| पता | उनाकोटि ग्राम, उत्तर त्रिपुरा |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 10:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 6:30 PM |
| बड़े त्योहार | माँ भबतारिणी मेला (चैत्र संक्रांति), दुर्गा पूजा |
| अगरतला से दूरी | 178 किमी (कुमारघाट के रास्ते) |
| नजदीकी रेलवे | कुमारघाट रेलवे स्टेशन |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:उनाकोटि के रास्ते से ही यहाँ पहुँचते हैं – दोनों एक ही जगह हैं।
रेल मार्ग:कुमारघाट स्टेशन से ऑटो/टैक्सी लें।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 178 किमी।
8. Deotamura, Gomati – नाव से जाइए, भगवान पहाड़ पर मिलेंगे
देवतामुरा एक ऐसी जगह है जहाँ पहुँचने का सफर खुद में एक यादगार अनुभव है। गोमती नदी को नाव से पार करने के बाद आप एक ऐसी पहाड़ी के पास पहुँचते हैं जिसकी दीवारों पर 15वीं-16वीं सदी में 37 से ज़्यादा देवी-देवताओं की विशाल मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। यह स्थल ASI द्वारा संरक्षित है।
शिव, दुर्गा और अन्य देवों की ये नक्काशियाँ देखकर अंदाज़ा होता है कि उस ज़माने के शिल्पकार कितने प्रतिभाशाली रहे होंगे। जो लोग इतिहास, धर्म और प्रकृति तीनों को एक साथ महसूस करना चाहते हैं उनके लिए यह जगह एकदम अलग है। (स्रोत: Wikipedia – Deotamura)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Deotamura Tripura Location
| देवता | शिव, दुर्गा एवं अन्य (ASI रॉक-कट मूर्तियाँ) |
| पता | देवतामुरा, गोमती नदी तट, उदयपुर से 40 किमी |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 5:00 PM |
| आरती समय | महाशिवरात्रि और विशेष पर्वों पर पूजा |
| बड़े त्योहार | महाशिवरात्रि, दुर्गा पूजा |
| अगरतला से दूरी | 75 किमी (उदयपुर होते हुए, नाव से नदी पार) |
| नजदीकी रेलवे | उदयपुर रेलवे स्टेशन (40 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (75 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:उदयपुर से 40 किमी। वहाँ से गोमती नदी पर नाव मिलती है। नाव की व्यवस्था पहले से करना बेहतर है।
रेल मार्ग:उदयपुर स्टेशन से टैक्सी लें।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 75 किमी।
9. Lakshmi Narayan Temple, Agartala – राजघराने का विष्णु मंदिर
त्रिपुरा के माणिक्य राजघराने ने अगरतला में जो मंदिर बनवाए उनमें लक्ष्मी नारायण मंदिर एक खास जगह है। भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर उड़ीसा शैली की वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है। इसे भारतीय हेरिटेज एक्ट के तहत संरक्षित किया गया है।
जन्माष्टमी पर यहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त आते हैं। मंदिर का परिसर साफ-सुथरा और शांत है – रोज़मर्रा की दर्शन के लिए भी और खास पर्वों पर भी यहाँ आना अच्छा लगता है। (स्रोत: Wikipedia – Lakshmi Narayan Temple Agartala)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Lakshmi Narayan Temple Agartala
| देवता | भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी |
| पता | अगरतला, पश्चिम त्रिपुरा – 799001 |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 9:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 7:00 AM | शाम आरती: 7:00 PM |
| बड़े त्योहार | जन्माष्टमी, राम नवमी, दीपावली |
| अगरतला से दूरी | शहर के अंदर (रेलवे स्टेशन से 4 किमी) |
| नजदीकी रेलवे | अगरतला रेलवे स्टेशन (4 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (14 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला शहर में ही। ऑटो रिक्शा से आसानी से पहुँचें।
रेल मार्ग:अगरतला रेलवे स्टेशन से 4 किमी।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 14 किमी।
10. Kasba Kali Bari, Agartala – शहर के दिल में माँ काली
अगरतला के पुराने कसबा इलाके में स्थित यह काली बाड़ी शहर के सबसे पुराने और लोकप्रिय शक्ति मंदिरों में से एक है। यहाँ के स्थानीय लोग माँ काली पर बहुत श्रद्धा रखते हैं और सुबह-शाम दर्शन के लिए आते हैं।
त्रिपुरा की तांत्रिक परंपरा का यह एक जीवंत उदाहरण है। काली पूजा और दुर्गा पूजा में यहाँ का नज़ारा बिल्कुल अलग होता है – ढोल-ढाक की गूँज और दीपों की रोशनी में माँ का श्रृंगार देखते ही बनता है। अगरतला में हैं तो इस मंदिर में जरूर जाएं। (स्रोत: Tripura Tourism Official)
स्थान देखें:Google Maps पर देखें – Kasba Kali Bari Agartala Location
| देवता | माँ काली |
| पता | कसबा, अगरतला, पश्चिम त्रिपुरा – 799001 |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – रात 9:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 5:30 AM | शाम आरती: 6:30 PM |
| बड़े त्योहार | काली पूजा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि |
| अगरतला से दूरी | शहर के अंदर (रेलवे स्टेशन से 3 किमी) |
| नजदीकी रेलवे | अगरतला रेलवे स्टेशन (3 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला (13 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
सड़क मार्ग:अगरतला में ही है। पूरे शहर से ऑटो या रिक्शा मिलता है।
रेल मार्ग:अगरतला रेलवे स्टेशन से 3 किमी।
हवाई मार्ग:अगरतला एयरपोर्ट से 13 किमी।
Travel Tips – जाने से पहले यह जरूर पढ़ें
कब जाएं? (Best Time to Visit)
- अक्टूबर से मार्च – मौसम ठंडा और सुहाना, घूमने के लिए सबसे बढ़िया।
- नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर) – माँ त्रिपुरा सुंदरी सहित सभी शक्ति मंदिरों पर भव्य उत्सव।
- खरची पूजा (जुलाई) – चतुर्दश देवता मंदिर में लाखों लोगों का जमावड़ा – एक बार जरूर देखें।
- चैत्र संक्रांति (अप्रैल) – उनाकोटि का बड़ा मेला।
क्या पहनें? Dress Code
- साधारण, शालीन कपड़े पहनें – पारंपरिक हो तो और भी अच्छा।
- मंदिर में जाने से पहले जूते-चप्पल बाहर उतारें।
- फोटो लेने से पहले पूछ लें – कुछ मंदिरों के गर्भगृह में फोटोग्राफी मना है।
और कुछ ज़रूरी बातें
- उनाकोटि और देवतामुरा के लिए पूरा दिन रखें – इन्हें जल्दी में नहीं देखा जा सकता।
- देवतामुरा जाने के लिए नाव की बुकिंग पहले से करें।
- पीक सीजन में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में सुबह जल्दी जाएं – भीड़ कम रहती है।
- अगरतला में हर बजट के होटल हैं; उदयपुर में गेस्टहाउस मिलते हैं।
- त्रिपुरा में खाना बहुत स्वादिष्ट है – मुई बोरोक (स्थानीय व्यंजन) जरूर ट्राई करें।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
त्रिपुरा का सबसे फेमस मंदिर कौन सा है?
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (माताबाड़ी, उदयपुर) सबसे प्रसिद्ध है। यह भारत के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। पूरी जानकारी: Wikipedia – Tripura Sundari Temple।
अगरतला में कौन-कौन से मंदिर हैं?
अगरतला में जगन्नाथ मंदिर, कसबा काली बाड़ी और लक्ष्मी नारायण मंदिर शहर के अंदर हैं। 14 किमी पर चतुर्दश देवता मंदिर और 31 किमी पर कमलासागर काली मंदिर है।
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का Darshan Time क्या है?
मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और रात 9 बजे बंद होता है। दोपहर 12 से 4 बजे तक बंद रहता है (अनुमानित – जाने से पहले confirm करें)।
क्या अगरतला से सभी मंदिरों तक खुद जा सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। अगरतला से बस, टैक्सी या खुद की गाड़ी से सभी प्रमुख मंदिरों तक पहुँचा जा सकता है। उनाकोटि और देवतामुरा थोड़े दूर हैं – उनके लिए एक पूरा दिन रखें।
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Balasore के प्रसिद्ध मंदिर: Darshan Timing, Aarti Time & Travel Guide (2026)

बालासोर (बालेश्वर) – ओडिशा के उत्तरी तट पर बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा यह जिला धर्म, प्रकृति और इतिहास का अनूठा संगम है। पञ्चलिंगेश्वर की पहाड़ी, खिराचोर गोपीनाथ का चमत्कारी मंदिर और चाँदीपुर का अनोखा समुद्र तट – बालासोर को ओडिशा का एक विशेष तीर्थ बनाते हैं।
बालासोर से लगभग 30 किमी दूर पञ्चलिंगेश्वर का वह अनोखा मंदिर है जहाँ एक झरना स्वयं पाँच शिवलिंगों पर निरंतर अभिषेक करता रहता है। इसके साथ ही 9 किमी दूर रेमुना का खिराचोर गोपीनाथ मंदिर वैष्णव परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
Balasore के प्रमुख मंदिर – एक नज़र में
- 1. पञ्चलिंगेश्वर मंदिर (Panchalingeswar Temple)
- 2. खिराचोर गोपीनाथ मंदिर, रेमुना (Khirachora Gopinath Temple)
- 3. एमामी जगन्नाथ मंदिर (Emami Jagannath Temple)
- 4. लंगलेश्वर शिव मंदिर (Langaleswar Temple)
- 5. भुधारा चंडी मंदिर, निलगिरि (Bhudhara Chandi Temple)
पञ्चलिंगेश्वर मंदिर (Panchalingeswar Temple)
पञ्चलिंगेश्वर मंदिर ओडिशा के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में से एक है। देवगिरि पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में एक झरने का पानी निरंतर पाँच प्राकृतिक शिवलिंगों पर बहता रहता है – यह प्रकृति द्वारा किया जाने वाला नित्य अभिषेक है।
पौराणिक मान्यता है कि ये पाँच शिवलिंग माँ सीता ने वनवास काल में स्थापित किए थे, और एक अन्य मान्यता के अनुसार राजा बाणासुर ने इन्हें स्थापित किया था। दर्शन के लिए पत्थर पर लेटकर अंदर झाँकना होता है – यह अनुभव अद्वितीय है। (स्रोत: Wikipedia – Panchalingeswar Temple)
स्थान:Google Maps पर देखें – पञ्चलिंगेश्वर मंदिर (Panchalingeswar Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान शिव – पाँच स्वयंभू शिवलिंग |
| पता | Devgiri Hill, near Nilagiri, Balasore District, Odisha – 756040 (30 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 7:00 AM – शाम 6:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 7:00 AM | शाम आरती: 5:30 PM |
| बड़े त्योहार | महाशिवरात्रि (लाखों भक्त), चैत्र मेला, श्रावण मास |
| Balasore से दूरी | बालासोर से 30 किमी | Nilagiri से 10 किमी |
| नजदीकी रेलवे | जलेश्वर Station (31 किमी) | बालासोर Station (30 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | भुवनेश्वर Airport (200 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:भुवनेश्वर Airport (200 किमी)
रेल मार्ग:जलेश्वर Station (31 किमी) | बालासोर Station (30 किमी)
सड़क मार्ग:बालासोर से 30 किमी | Nilagiri से 10 किमी
खिराचोर गोपीनाथ मंदिर, रेमुना (Khirachora Gopinath Temple)
रेमुना का खिराचोर गोपीनाथ मंदिर वैष्णव परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है। इस मंदिर की एक विशेष कहानी है – भगवान गोपीनाथ माधवेन्द्र पुरी के लिए रात को चोरी से खीर (मिठाई) चुराते थे, इसीलिए इन्हें ‘खीर-चोर’ कहते हैं।
श्री चैतन्य महाप्रभु भी इस मंदिर में आए थे और यहाँ प्रसाद ग्रहण किया था। यह मंदिर उनकी यात्रा का प्रमाण भी है। जन्माष्टमी पर यहाँ भव्य उत्सव होता है। यहाँ का खीर प्रसाद विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
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मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान श्री कृष्ण – गोपीनाथ (खीर-चोर) |
| पता | Remuna, Balasore District, Odisha – 756019 (9 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – रात 10:00 PM |
| आरती समय | मंगला आरती: 5:00 AM | भोग आरती: 11:00 AM | शाम संध्या: 7:00 PM | रात्रि आरती: 10:00 PM |
| बड़े त्योहार | जन्माष्टमी, राधाष्टमी, रथ यात्रा, झुलन उत्सव |
| Balasore से दूरी | बालासोर से 9 किमी |
| नजदीकी रेलवे | बालासोर Station (9 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | भुवनेश्वर Airport (209 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:भुवनेश्वर Airport (209 किमी)
रेल मार्ग:बालासोर Station (9 किमी)
सड़क मार्ग:बालासोर से 9 किमी
(स्रोत: Odisha Tourism – Balasore)
एमामी जगन्नाथ मंदिर (Emami Jagannath Temple)
एमामी जगन्नाथ मंदिर बालासोर का सबसे आधुनिक और भव्य मंदिर है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की परंपरा में बना यह मंदिर वास्तुकला और भक्ति का सुंदर संगम है।
रथ यात्रा के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। मंदिर का साफ-सुथरा परिसर और सुंदर प्रतिमाएं दर्शनीय हैं।
स्थान:Google Maps पर देखें – एमामी जगन्नाथ मंदिर (Emami Jagannath Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा |
| पता | Emami Jagannath Mandir, Balasore, Odisha |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 9:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 7:00 PM |
| बड़े त्योहार | रथ यात्रा, स्नान पूर्णिमा, जन्माष्टमी |
| Balasore से दूरी | बालासोर Railway Station के पास |
| नजदीकी रेलवे | बालासोर Station (1 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | भुवनेश्वर Airport (200 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:भुवनेश्वर Airport (200 किमी)
रेल मार्ग:बालासोर Station (1 किमी)
सड़क मार्ग:बालासोर Railway Station के पास
(स्रोत: Odisha Tour – Balasore)
लंगलेश्वर शिव मंदिर (Langaleswar Temple)
लंगलेश्वर मंदिर एक अनोखी पौराणिक कथा से जुड़ा है – यहाँ भगवान शिव ने स्वयं हल चलाया था, इसी कारण उनका नाम ‘लंगलेश्वर’ (हल वाले) पड़ा। एक विशाल हल यहाँ प्रतीक स्वरूप रखा गया है।
महाशिवरात्रि पर यहाँ बड़ा उत्सव होता है और सैकड़ों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। शांत ग्रामीण वातावरण में यह मंदिर एक विशेष अनुभव देता है।
स्थान:Google Maps पर देखें – लंगलेश्वर शिव मंदिर (Langaleswar Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान शिव – लंगलेश्वर (हल रूप) |
| पता | Langaleswar, Jaleswar Block, Balasore District, Odisha (43 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 6:30 PM |
| आरती समय | सुबह अभिषेक: 6:30 AM | शाम आरती: 6:00 PM |
| बड़े त्योहार | महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवार |
| Balasore से दूरी | बालासोर से 43 किमी | जलेश्वर से 30 किमी |
| नजदीकी रेलवे | जलेश्वर Station (30 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | भुवनेश्वर Airport (220 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:भुवनेश्वर Airport (220 किमी)
रेल मार्ग:जलेश्वर Station (30 किमी)
सड़क मार्ग:बालासोर से 43 किमी | जलेश्वर से 30 किमी
(स्रोत: Odisha Tour – Balasore)
भुधारा चंडी मंदिर, निलगिरि (Bhudhara Chandi Temple)
भुधारा चंडी मंदिर गंग वंश के राजा बसंत भुजंग मंधाता ने एक शताब्दी पूर्व बनवाया था। पञ्चलिंगेश्वर यात्रा के रास्ते में स्थित यह मंदिर दोनों तीर्थों को एक साथ देखने का अवसर देता है।
नवरात्रि में यहाँ ओडिशा और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों से भक्त आते हैं। पहाड़ी स्थान होने से यहाँ का वातावरण शांत और प्रकृति सुंदर दिखती है।
स्थान:Google Maps पर देखें – भुधारा चंडी मंदिर, निलगिरि (Bhudhara Chandi Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ भुधारा चंडी (दुर्गा स्वरूप) |
| पता | Bhudhara, Nilagiri, Balasore District, Odisha – 756040 (28 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 7:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम महाआरती: 6:30 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि (विशाल मेला), दुर्गा पूजा |
| Balasore से दूरी | बालासोर से 28 किमी | निलगिरि से 5 किमी |
| नजदीकी रेलवे | बालासोर Station (28 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | भुवनेश्वर Airport (210 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:भुवनेश्वर Airport (210 किमी)
रेल मार्ग:बालासोर Station (28 किमी)
सड़क मार्ग:बालासोर से 28 किमी | निलगिरि से 5 किमी
(स्रोत: Odisha Tour – Balasore Temples)
Travel Tips – Balasore यात्रा के लिए सुझाव
कब जाएं? (Best Time to Visit)
- अक्टूबर से मार्च – मौसम सुहाना, यात्रा आरामदायक।
- नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव और माहौल।
- सुबह जल्दी जाएं – कम भीड़, शांत वातावरण।
अन्य सुझाव
- शालीन वस्त्र पहनें, जूते-चप्पल बाहर उतारें।
- पहाड़ी मंदिरों में आरामदायक जूते और पानी साथ रखें।
- Balasore का स्थानीय खाना जरूर चखें।
Balasore का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?
पञ्चलिंगेश्वर मंदिर (Panchalingeswar Temple) Balasore का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।
Balasore मंदिर का Darshan Time क्या है?
सुबह 7:00 AM – शाम 6:00 PM
Balasore कैसे पहुँचें?
हवाई – भुवनेश्वर बीजू पटनायक हवाई अड्डा (200 किमी) | रेल – बालासोर रेलवे स्टेशन
Balasore जाने का सबसे अच्छा समय?
अक्टूबर से मार्च के बीच। नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव।
Temples
Balaghat के प्रसिद्ध मंदिर – Darshan Timing, Aarti Time & Travel Guide

बालाघाट – मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्व में स्थित यह जिला वैनगंगा नदी के किनारे बसा है। घने जंगलों, कान्हा टाइगर रिजर्व और खनिज संपदा के साथ-साथ बालाघाट की धार्मिक विरासत भी अत्यंत समृद्ध है। यहाँ के मंदिरों में गोंड, मराठा और प्राचीन हिंदू परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
रामपायली मंदिर, जवालादेवी, माँ कालीपथ और लाँजी का किला-मंदिर – ये बालाघाट के वे स्थल हैं जहाँ आस्था और प्रकृति एक साथ मिलते हैं। अगर आप कान्हा टाइगर रिजर्व घूमने आएं तो इन मंदिरों के दर्शन भी जरूर करें।
Balaghat के प्रमुख मंदिर – एक नज़र में
- 1. रामपायली मंदिर (Rampayali Ram Mandir)
- 2. माँ जवालादेवी मंदिर, भरवेली (Jwaladevi Temple)
- 3. माँ कालीपथ मंदिर (Maa Kalipath Temple)
- 4. लाँजी किला मंदिर – महामाया और महादेव (Lanji Fort Temple)
- 5. नहलेसरा मंदिर – अम्मा माई (Nahlesara Amma Mai Temple)
रामपायली मंदिर (Rampayali Ram Mandir)
रामपायली मंदिर बालाघाट का सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है। स्थानीय मान्यता के अनुसार 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम के पदचिन्ह यहाँ पड़े थे, इसीलिए इस स्थान का नाम ‘रामपायली’ (राम के पाँव) पड़ा। लगभग 600 वर्ष पूर्व मराठा भोंसले वंश ने इस मंदिर का निर्माण नदी तट पर वैज्ञानिक पद्धति से किया था।
एक अनोखी विशेषता यह है कि सूर्य की पहली किरण सीधे भगवान राम के चरणों पर पड़ती है। मंदिर के पास हनुमान मंदिर भी है जो समग्र दर्शन को पूर्ण करता है। राम नवमी पर यहाँ विशाल मेला लगता है।
स्थान:Google Maps पर देखें – रामपायली मंदिर (Rampayali Ram Mandir) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान राम, सीता और बालाजी |
| पता | Rampayali, Balaghat City Centre, Madhya Pradesh – 481001 |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 9:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 7:00 PM |
| बड़े त्योहार | राम नवमी, दीपावली, राम बारात |
| Balaghat से दूरी | बालाघाट शहर के केंद्र में |
| नजदीकी रेलवे | बालाघाट Station (1 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | जबलपुर Airport (170 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:जबलपुर Airport (170 किमी)
रेल मार्ग:बालाघाट Station (1 किमी)
सड़क मार्ग:बालाघाट शहर के केंद्र में
(स्रोत: Balaghat District Official)
माँ जवालादेवी मंदिर, भरवेली (Jwaladevi Temple)
भरवेली क्षेत्र की पहाड़ी पर स्थित माँ ज्वालादेवी और उनके भाई गोमजी-सोमजी का मंदिर बालाघाट का प्रमुख शक्ति तीर्थ है। पहाड़ी पर स्थित होने से यहाँ का दृश्य बेहद सुंदर होता है।
नवरात्रि में यहाँ मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र दोनों राज्यों से हजारों भक्त आते हैं। पहाड़ी चढ़ाई थोड़ी कठिन है लेकिन माँ के दर्शन के बाद सारी थकान छू-मंतर हो जाती है।
स्थान:Google Maps पर देखें – माँ जवालादेवी मंदिर, भरवेली (Jwaladevi Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ ज्वालादेवी (दुर्गा स्वरूप) |
| पता | Bharveli Region, Balaghat District, MP (10 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 7:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 6:30 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि (हजारों भक्त MP और महाराष्ट्र से) |
| Balaghat से दूरी | बालाघाट से 10 किमी |
| नजदीकी रेलवे | बालाघाट Station (10 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | जबलपुर Airport (180 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:जबलपुर Airport (180 किमी)
रेल मार्ग:बालाघाट Station (10 किमी)
सड़क मार्ग:बालाघाट से 10 किमी
(स्रोत: Balaghat Places of Interest)
माँ कालीपथ मंदिर (Maa Kalipath Temple)
माँ कालीपथ मंदिर बालाघाट के वन क्षेत्र में स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार माँ की प्रतिमा स्वयं धरती से प्रकट हुई थी और धीरे-धीरे ऊपर आती जा रही है। यह अनोखी मान्यता इस मंदिर को विशेष बनाती है।
शांत वन्य वातावरण में स्थित यह मंदिर प्रकृति प्रेमियों और भक्तों दोनों को आकर्षित करता है। नवरात्रि में यहाँ विशेष पूजा और जागरण का आयोजन होता है।
स्थान:Google Maps पर देखें – माँ कालीपथ मंदिर (Maa Kalipath Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ काली (स्वयंभू प्रतिमा) |
| पता | Forest Colony, Balaghat District, MP |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – रात 8:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 7:00 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि, काली पूजा |
| Balaghat से दूरी | बालाघाट शहर के भीतर |
| नजदीकी रेलवे | बालाघाट Station (3 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | जबलपुर Airport (170 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:जबलपुर Airport (170 किमी)
रेल मार्ग:बालाघाट Station (3 किमी)
सड़क मार्ग:बालाघाट शहर के भीतर
(स्रोत: Balaghat Tourism)
लाँजी किला मंदिर – महामाया और महादेव (Lanji Fort Temple)
लाँजी का किला और उसके भीतर स्थित मंदिर 12वीं शताब्दी के हैं और इनका संबंध गोंड राजवंश से है। घने जंगल में स्थित इस किले में महामाया, महादेव सहित अनेक प्राचीन मूर्तियाँ हैं।
लाँजी प्रकृति और इतिहास प्रेमियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है। कान्हा टाइगर रिजर्व के रास्ते में आने वाले पर्यटक यहाँ अवश्य रुकते हैं।
स्थान:Google Maps पर देखें – लाँजी किला मंदिर – महामाया और महादेव (Lanji Fort Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ महामाया, भगवान महादेव |
| पता | Lanji Tehsil, Balaghat District, MP (58 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM |
| आरती समय | सुबह आरती: 6:30 AM | शाम आरती: 5:30 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि, महाशिवरात्रि |
| Balaghat से दूरी | बालाघाट से 58 किमी |
| नजदीकी रेलवे | बालाघाट Station (58 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | जबलपुर Airport (170 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:जबलपुर Airport (170 किमी)
रेल मार्ग:बालाघाट Station (58 किमी)
सड़क मार्ग:बालाघाट से 58 किमी
(स्रोत: Travelladda – Balaghat)
नहलेसरा मंदिर – अम्मा माई (Nahlesara Amma Mai Temple)
नहलेसरा बाँध के पीछे 1 किमी की दूरी पर माँ अम्मा माई का प्राकृतिक मंदिर है। बाँध का सुंदर जलाशय और हरा-भरा वातावरण इस मंदिर को एक अनोखा रूप देता है।
यहाँ आकर माँ के दर्शन करें और बाँध का सुंदर नजारा देखें – दोनों मिलाकर एक अविस्मरणीय अनुभव बनते हैं। नवरात्रि में यहाँ स्थानीय भक्तों की विशेष भीड़ होती है।
स्थान:Google Maps पर देखें – नहलेसरा मंदिर – अम्मा माई (Nahlesara Amma Mai Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ अम्मा माई (ग्राम देवी) |
| पता | Nahlesara Dam area, Balaghat District, MP (58 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM |
| आरती समय | सुबह पूजा: 7:00 AM | शाम आरती: 5:30 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि, स्थानीय यात्रा उत्सव |
| Balaghat से दूरी | बालाघाट से 58 किमी |
| नजदीकी रेलवे | बालाघाट Station (58 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | जबलपुर Airport (160 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:जबलपुर Airport (160 किमी)
रेल मार्ग:बालाघाट Station (58 किमी)
सड़क मार्ग:बालाघाट से 58 किमी
(स्रोत: Balaghat District Official)
Travel Tips – Balaghat यात्रा के लिए सुझाव
कब जाएं? (Best Time to Visit)
- अक्टूबर से मार्च – मौसम सुहाना, यात्रा आरामदायक।
- नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव और माहौल।
- सुबह जल्दी जाएं – कम भीड़, शांत वातावरण।
अन्य सुझाव
- शालीन वस्त्र पहनें, जूते-चप्पल बाहर उतारें।
- पहाड़ी मंदिरों में आरामदायक जूते और पानी साथ रखें।
- Balaghat का स्थानीय खाना जरूर चखें।
Balaghat का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?
रामपायली मंदिर (Rampayali Ram Mandir) Balaghat का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।
Balaghat मंदिर का Darshan Time क्या है?
सुबह 6:00 AM – रात 9:00 PM
Balaghat कैसे पहुँचें?
हवाई – जबलपुर हवाई अड्डा (170 किमी) | रेल – बालाघाट रेलवे स्टेशन
Balaghat जाने का सबसे अच्छा समय?
अक्टूबर से मार्च के बीच। नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव।
Temples
Baijnath के प्रसिद्ध मंदिर – Darshan Timing, Aarti Time & Travel Guide

बैजनाथ – हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में बिनवा नदी के तट पर धौलाधार पर्वत की गोद में बसा यह नगर ‘वैद्यनाथ’ यानी ‘चिकित्सा के देवता’ भगवान शिव की भूमि है। 1204 ई. में बना बैजनाथ मंदिर 800 से अधिक वर्षों से अपने मूल स्वरूप में खड़ा है।
यहाँ की एक अनोखी परंपरा है – दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता क्योंकि रावण यहाँ का परम भक्त माना जाता है। बीर-बिलिंग (19 किमी) और पालमपुर (16 किमी) के पास होने से यह आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन का आदर्श केंद्र है।
Baijnath के प्रमुख मंदिर – एक नज़र में
- 1. बैजनाथ शिव मंदिर – वैद्यनाथ धाम (Baijnath Vaidyanath Temple)
- 2. चामुंडा देवी मंदिर (Chamunda Devi Temple)
- 3. ज्वालामुखी मंदिर (Jwalamukhi – 51 Shakti Peeth)
- 4. बृजेश्वरी देवी मंदिर, काँगड़ा (Brajeshwari Devi – Shakti Peeth)
- 5. महारानी मंदिर, गुलमर्ग (Maharani Temple Gulmarg)
बैजनाथ शिव मंदिर – वैद्यनाथ धाम (Baijnath Vaidyanath Temple)
बैजनाथ मंदिर 1204 ई. में व्यापारियों अहुका और मन्युका ने बनवाया था – यह ASI संरक्षित ‘National Monument’ है। नागर शैली का यह मंदिर 800+ वर्षों से मूल स्वरूप में है। पौराणिक कथा के अनुसार रावण ने कैलाश से लाया शिवलिंग यहाँ जमीन पर रख दिया जो स्थायी रूप से अर्धनारीश्वर रूप में स्थापित हो गया।
मंदिर की दीवारों पर संस्कृत और पहाड़ी भाषा में दो बड़े शिलालेख हैं जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण हैं। (स्रोत: Wikipedia – Baijnath Temple)
स्थान:Google Maps पर देखें – बैजनाथ शिव मंदिर – वैद्यनाथ धाम (Baijnath Vaidyanath Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान शिव – वैद्यनाथ, अर्धनारीश्वर शिवलिंग |
| पता | Baijnath Town, Kangra, HP – 176125 (Palampur से 16 किमी) |
| दर्शन समय | गर्मी: 4:00 AM-8:45 PM | सर्दी: 5:30 AM-8:00 PM |
| आरती समय | सुबह: 5:15 AM | भोग: 11:45 AM | शाम: 7:15 PM |
| बड़े त्योहार | महाशिवरात्रि (5 दिन राज्यस्तरीय उत्सव), श्रावण सोमवार। दशहरा यहाँ नहीं मनाया जाता। |
| Baijnath से दूरी | पालमपुर 16 किमी | धर्मशाला 54 किमी | बीर 19 किमी |
| नजदीकी रेलवे | बैजनाथ-पपरोला Station (3 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | काँगड़ा Airport (50 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:काँगड़ा Airport (50 किमी)
रेल मार्ग:बैजनाथ-पपरोला Station (3 किमी)
सड़क मार्ग:पालमपुर 16 किमी | धर्मशाला 54 किमी | बीर 19 किमी
चामुंडा देवी मंदिर (Chamunda Devi Temple)
चामुंडा देवी मंदिर काँगड़ा घाटी का सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। बाणगंगा नदी के तट पर घने जंगल में स्थित यह मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है।
नवरात्रि में यहाँ हजारों भक्त आते हैं। बंदरों से प्रसाद बचाकर रखें।
स्थान:Google Maps पर देखें – चामुंडा देवी मंदिर (Chamunda Devi Temple) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ चामुंडा देवी (दुर्गा का रूप) |
| पता | Chamunda Devi, Palampur, Kangra (22 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – शाम 8:00 PM |
| आरती समय | सुबह: 5:30 AM | शाम: 7:00 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि, दुर्गा अष्टमी |
| Baijnath से दूरी | बैजनाथ से 22 किमी |
| नजदीकी रेलवे | पपरोला (20 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | काँगड़ा Airport (37 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:काँगड़ा Airport (37 किमी)
रेल मार्ग:पपरोला (20 किमी)
सड़क मार्ग:बैजनाथ से 22 किमी
(स्रोत: HP Tourism)
ज्वालामुखी मंदिर (Jwalamukhi – 51 Shakti Peeth)
ज्वालामुखी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ बिना किसी ईंधन के प्राकृतिक गैस की ज्वाला निरंतर जलती रहती है – यह एक अद्भुत प्राकृतिक चमत्कार है।
नवरात्रि पर यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं। बैजनाथ यात्रा के साथ ज्वालामुखी दर्शन जोड़ना बेहद फायदेमंद है।
स्थान:Google Maps पर देखें – ज्वालामुखी मंदिर (Jwalamukhi – 51 Shakti Peeth) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ ज्वालामुखी (51 शक्तिपीठों में) |
| पता | Jwalamukhi, Kangra District (60 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – रात 10:00 PM |
| आरती समय | सुबह: 5:30 AM | शाम: 7:30 PM | रात: 10:00 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि (लाखों भक्त), ज्वाला जी मेला |
| Baijnath से दूरी | बैजनाथ से 60 किमी |
| नजदीकी रेलवे | ज्वालामुखी Road Station (25 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | काँगड़ा Airport (35 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:काँगड़ा Airport (35 किमी)
रेल मार्ग:ज्वालामुखी Road Station (25 किमी)
सड़क मार्ग:बैजनाथ से 60 किमी
(स्रोत: HP Tourism)
बृजेश्वरी देवी मंदिर, काँगड़ा (Brajeshwari Devi – Shakti Peeth)
बृजेश्वरी देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माता सती की छाती गिरी थी। काँगड़ा किले के पास स्थित यह मंदिर काँगड़ा घाटी का प्रमुख धार्मिक केंद्र है।
बैजनाथ से एक दिन में काँगड़ा जाया जा सकता है। काँगड़ा किला और चाय के बागान भी पास में हैं।
स्थान:Google Maps पर देखें – बृजेश्वरी देवी मंदिर, काँगड़ा (Brajeshwari Devi – Shakti Peeth) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | माँ बृजेश्वरी देवी (51 शक्तिपीठ) |
| पता | Kangra, Kangra District (55 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 5:00 AM – रात 9:00 PM |
| आरती समय | सुबह: 5:30 AM | शाम महाआरती: 8:00 PM |
| बड़े त्योहार | नवरात्रि |
| Baijnath से दूरी | बैजनाथ से 55 किमी |
| नजदीकी रेलवे | काँगड़ा Mandir Station (1 किमी – Toy Train) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | काँगड़ा Airport (15 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:काँगड़ा Airport (15 किमी)
रेल मार्ग:काँगड़ा Mandir Station (1 किमी – Toy Train)
सड़क मार्ग:बैजनाथ से 55 किमी
(स्रोत: HP Tourism)
महारानी मंदिर, गुलमर्ग (Maharani Temple Gulmarg)
हिमाचल के बैजनाथ के आसपास काँगड़ा घाटी में Masrur Rock-Cut Temples (40 किमी) भी हैं जो 8वीं शताब्दी के अद्भुत मंदिर हैं। ASI द्वारा संरक्षित ये मंदिर पत्थर काटकर बनाए गए हैं।
बैजनाथ यात्रा को Masrur, Bir Billing और धर्मशाला के साथ जोड़कर काँगड़ा की एक शानदार धार्मिक-पर्यटन यात्रा की जा सकती है।
स्थान:Google Maps पर देखें – महारानी मंदिर, गुलमर्ग (Maharani Temple Gulmarg) Location
मंदिर की जानकारी | Temple Information
| देवता | भगवान शिव |
| पता | Gulmarg Town, Baramulla, J&K (Baijnath से ~200 किमी) |
| दर्शन समय | सुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM |
| आरती समय | सुबह: 6:30 AM | शाम: 5:30 PM |
| बड़े त्योहार | महाशिवरात्रि |
| Baijnath से दूरी | बैजनाथ यात्रा के सन्दर्भ में – Dharamshala 50 किमी |
| नजदीकी रेलवे | पपरोला (3 किमी) |
| नजदीकी एयरपोर्ट | काँगड़ा Airport (50 किमी) |
कैसे पहुँचें | How to Reach
हवाई मार्ग:काँगड़ा Airport (50 किमी)
रेल मार्ग:पपरोला (3 किमी)
सड़क मार्ग:बैजनाथ यात्रा के सन्दर्भ में – Dharamshala 50 किमी
(स्रोत: HP Tourism – Masrur)
Travel Tips – Baijnath यात्रा के लिए सुझाव
कब जाएं? (Best Time to Visit)
- अक्टूबर से मार्च – मौसम सुहाना, यात्रा आरामदायक।
- प्रमुख त्योहारों – नवरात्रि, महाशिवरात्रि, रथ यात्रा – पर विशेष उत्सव।
- सुबह जल्दी जाएं – कम भीड़, शांत वातावरण।
अन्य सुझाव
- शालीन वस्त्र पहनें, जूते-चप्पल बाहर उतारें।
- Baijnath का स्थानीय खाना जरूर चखें।
- पहाड़ी मंदिरों में पानी साथ रखें।
Baijnath का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?
उत्तर: बैजनाथ शिव मंदिर – वैद्यनाथ धाम (Baijnath Vaidyanath Temple) Baijnath का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।
Baijnath मंदिर का Darshan Time क्या है?
गर्मी: 4:00 AM-8:45 PM | सर्दी: 5:30 AM-8:00 PM
Baijnath कैसे पहुँचें?
हवाई – काँगड़ा एयरपोर्ट गग्गल (50 किमी) | रेल – बैजनाथ-पपरोला Station (3 किमी)
Baijnath जाने का सबसे अच्छा समय?
अक्टूबर से मार्च। प्रमुख त्योहारों पर विशेष अनुभव।
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